कुछ रिश्तों की इतनी ही उम्र होती है

आज सर्दियों की धुंध भरी शाम है। मैं धीरे-धीरे चलते हुए घर लौट रहा हूँ। सड़क के किनारे लगीं पोल लाइटों से उर्जित प्रकाश कोहरे को नीली चादर की भांति खुद से लपेटे हुए है ।

अर्पिता के साथ बिताए पल मुझे यूं ही याद आने लगे हैं। वह कोहरे की इस नीली चादर को ध्यान से देखा करती और मुझसे ऐसे सवाल पूछती जिनके उत्तर मुझे पता नही होते थे।

जैसे कि वह पूछती कि यह चादर क्यों बनती है इसे कौन ओढ़ता है। मैं भला इनका क्या जवाब देता सो कह देता कि सर्दियों में इन बेघर लोगों को ठंड से बचाने के लिए ऐसी चादर बनती है।

वह सड़क के किनारे ठंड से ठिठुरते मजलूमों को देखती और देर तक पता नही क्या सोचती रहती। इसी सड़क पर हम हाथों में उंगलियां फँसाये घण्टों चहलकदमी किया करते वह थक जाने पर अपना सिर मेरे कंधे से टिका देती थी।

यह शहर हमारा अपना शहर नही था तब भी इसने हमे पराया महसूस नही होने दिया।वह उज्जैन से थी तो मैं बुलन्दशहर से। हम एक ही कम्पनी में कार्यरत थे और 2 वर्ष पहले हमारी मुलाकात उसी कम्पनी के एक सेमिनार में हुई थी।

लोग कहते हैं कि जिससे दिल मिल जाये,जो मन मे बस जाए अक्सर वह हमसे बिछड़ जाता है। लोग ठीक ही कहते हैं। उसने मुझसे कभी प्यार का इजहार नही किया ,वह इतना करीब थी कि प्यार का इजहार करना भी गैर मुनासिब लगता।जिससे हमें सच्चा प्रेम हो उससे हम कभी नही कहेंगे कि हमे तुमसे प्यार है।

जरूरत ही नही पड़ती क्योंकि हम इतना करीब होते हैं कि ये शब्द जुबां पर लाना बेमानी लगता है। अर्पिता ने भी मुझसे कभी नही कहा।

यद्यपि हम मिलते,घण्टों बातें करते,शॉपिंग मॉल जाते,पार्क में बैठते और देर तक बिना बात के हंसते रहते। हाँ प्रेम ही तो था वरना कोई यूं ही किसी की गोद मे सिर रखकर सो तो नही जाता।

वह अक्सर कहा करती कि तुम लड़के लोग लड़कियों की फीलिंग्स नही समझते तुमको तो बस….. और मैं कुछ और बोलने से रोकने के लिए उसके मुंह पर हाथ रख देता।

“सब ऐसे नही होते” मैं कहता।

 

“मुझे मालूम है, कम से कम तुम वैसे नही हो”वह कहती और हौले से मेरे बाल सहला देती।

फिर चिढ़ाने के उद्देश्य से कहती “हालांकि थोड़े-थोड़े हो..” मैं उसे आंखे तरेर कर देखता तो वह हंस पड़ती। उसको मुस्कुराते देख लगता जैसे सारी कायनात मुस्कुरा पड़ी हो।

★★

आज उसको यहां से गए 3 महीने होने को है।मैं हर रोज उसे खोजने इसी सड़क पर निकलता हूँ।यद्यपि जानता हूँ कि वह अब इस सड़क पर मुझे नही मिलने वाली।

पिछले महीने उसकी शादी हो गई।जब वह यहां से जा रही थी तब हम दोनों ही उदास थे। हमेशा हंसने मुस्कुराने वाली वह लड़की उस दिन रो रही थी।  उसने जाते हुए सिर्फ इतना ही कहा था-

“कुछ रिश्तों की इतनी ही उम्र होती है…..”

 

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लेखक : भूपेंद्र सिंह चौहान

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Comments

2 responses to “कुछ रिश्तों की इतनी ही उम्र होती है”

  1. Amarendra Pratap Singh Avatar
    Amarendra Pratap Singh

    Congratulations for your writing ?

    1. Bhupendra Singh Avatar
      Bhupendra Singh

      ?❤️

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