ये प्यारे प्यारे बच्चे

प्यारे बच्चे | Kavita Pyare Bache

प्यारे बच्चे

( Pyare Bache )

मन के सच्चे प्यारे बच्चे,
हर जिद को रोकर मनवा लेते,
शैतानी में शैतान के बप्पा,
फिर जिद से हर काम करा लेते।

बातें ऐसी मन को मोहें,
वीर भाव से लोहा लें।
नंग-धडंग घूमते घर में,
इटली दो, पोहा पर लोटें।

ऐसी हालत घर का बनाए,
मेहमान भी बचते गिर जाए।
हर कोना गुलजार शोर से ,
जब तब दिवाल से भिड़ जाए।

सब्जी फल खाने से दूर रहें,
मैंगी पिज्जा बर्गर चिप्स कहें।
उनकी अगर लड़ाई देखो,
दांत टीसते फौरन काटें ।

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

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