मोबाइल फोन | Hindi Poem on Mobile

मोबाइल फोन

( Mobile phone ) 

संचार क्रांति का द्योतक सूचनाओं का संसार,
घर बैठे करें मनोरंजन और व्यापार ।
ज्ञान का यह पिटारा,
लुटा रहा प्यार इस पर जग सारा।
स्क्रीन पर उंगलियां घिसते,
नेट स्लो होने पर हैं दांत पीसते।
बच्चे व्यस्क या हों बूढ़े,
रख हाथों में कुछ ना कुछ ढ़ूंढ़ें।
पाकर सब इसे अपनी दुनिया में मस्त हैं,
एक नई आभासी दुनिया में ही व्यस्त हैं।
नवीन ज्ञान के भंडार खोलता-
खोलता प्रगति के नए द्वार,
युवाओं को संबल देता और देता रोजगार।
पर युवाओं बच्चों,चलाओ इसे संभलकर,
भरोसा न करना इसपर कभी आंखें मूंदकर।
कुछ फैलाते नफ़रत द्वेष जानबूझकर,
ऐसों से रहना सतर्क और संभलकर।
दोस्तों संग मिलकर सच को भी ढ़ूंढ़ो,
जाओ गली मुहल्लों में पड़ोसियों को जानों,
बात करो कुछ जानो उनको,मेरा कहना मानो।
तब पता चलेगा! क्या है सूचनाओं की सच्चाई ?
समझे बच्चों! मेरी बात समझ तुम्हें आई?
यह कर सकता है तुम्हारे सपने सच,
करो विवेक से उपयोग बस !
यह राह भी दिखाता है,
राह से भी भटकाता है।
अंधेरे में रौशनी दिखाता,
जीवन के हर राज खोलता।
ऐसा है यह फोन!
बिना इसके बोलो, अब रह पाता कौन?

नवाब मंजूर

लेखक– मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

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One response to “मोबाइल फोन | Hindi Poem on Mobile”

  1. Ishita tiwari Avatar
    Ishita tiwari

    Good

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