खेल के सूत्र बनाएँ जीवन

खेल के सूत्र बनाएँ जीवन

खेल के सूत्र बनाएँ जीवन

खेल की क्रीड़ा निराली बैर ,
कभी धैर्य, परीश्रम, लगन है l
तो कभी खिन्न – उदास दर है ,
सहयोग , एकता भी न भूलो l
तो खेल से क्या मिला ,
हार – जीत या आत्मनिर्भर l

स्वस्त है , मस्त है ,
जिससे तन – मन चुस्त है l
सिद्धांत नव दो ग्यारह नहीं ,
सिद्धांत खेल – खेलना सही l
तो खेल से क्या मिला ,
हार – जीत या आत्मनिर्भर l

नाम भी मिला , धन भी मिला ,
सुख – सुविधा का भंडार मिला l
कल तक था , मित्र – संबंधी का ,
आज सितारा हूँ , दुनिया का l
यूँही नहीं बने विश्व विजेता ,
कपिल, सुनिल, सिद्धू , अज़र l
सचिन,द्रविड़, गांगुली, धोनी, यूवी, ज़हिर,
कोहली , रोहित और बोमरा l
तो खेल से क्या मिला ,
हार – जीत या आत्मनिर्भर l

कभी पाना , कभी खोना ,
यहीं असमंझस खेल भुना l
छात्र से युवापीढ़ी तक ,
स्कूल से विश्वविद्यालय तक l
बना खेल पर्व दिवस ,
तो खेल से क्या मिला l
हार – जीत या आत्मनिर्भर l

खेल अनुशासन – दृढ़ संकल्प है ,
संस्कृति , सभ्यता का प्रतीक है l
खेल एक हुनर – पाठ है ,
जो सीखा, वो जीता है l
ध्यान चंद , पीटी उषा याद हैं ,
एक लव्य , अर्जुन – द्रोणाचार्य ,
गुरु – शिष्य की मर्यादा है l
तो खेल से क्या मिला ,
हार – जीत या आत्मनिर्भर l

खेल सिखाता है , खेल के कई सूत्र ,
जो सीखता है , सो जीतता है l
देखा आज तुंगल घर खेल में ,
तीखे – मीठे थे आभास शब्द में l
न वीर , न अधीर थे तुंगल बलबीर थे l
तो खेल से क्या मिला ,
हार – जीत या आत्मनिर्भर l

वाहिद खान पेंडारी

( हिंदी : प्राध्यापक ) उपनाम : जय हिंद

Tungal School of Basic & Applied Sciences , Jamkhandi

Karnataka

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