Mauke ka Waqt

मौके का वक्त | Mauke ka Waqt

मौके का वक्त

( Mauke ka waqt ) 

 

 

मिल जाता है मौका भी कभी-कभी

उन अपनों को आजमाने का

जो भरते हैं दंभ अपनेपन का

लगा देते हैं शर्त वक्त की

 

वक्त के प्रवाह से बचा भी नहीं कोई

वक्त ने डुबाया भी नहीं किसी को

वक्त देता है मौका सभी को कोई

 डूब जाता है कोई संभल जाता है

 

साथ की हामी भरने वालों पर ही

रहता नहीं अवलंबित कोई

छटपटाहट के प्रयास में

तिनका भी पार लगा ही देता है

 

अक्सर उनकी मजबूरी और व्यस्तता

तब और अधिक बढ़ जाती है

जब आपको उनकी जरूरत होती है

यही वक्त भी होता है उनके शर्त का

 

आए हुए समय को तो गुजरना ही है

इसी में आपको परखना भी है

लगानी है उम्मीद भी किससे कितनी

यह अभी ही आपको समझना भी है

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

व्यर्थ की सोच | Vyarth ki Soch

Similar Posts

  • प्रकृति और मानव की उत्पत्ति

    प्रकृति और मानव की उत्पत्ति प्रकृति की गोद मेंमानव की उत्पत्ति हुई।पेड़-पौधों की छाया में मानव का बचपन बीता।प्रकृति की सुंदरता नेमानव को आकर्षित किया। प्रकृति की शक्ति नेमानव को मजबूत बनाया।प्रकृति की सुंदरता नेमानव को जीवन का आनंद दिया।प्रकृति की गोद मेंमानव ने अपने जीवनकी शुरुआत की। प्रकृति की सुंदरता नेमानव को जीवन काप्रकृति…

  • Hindi Poetry On Life | Hindi Poem -भाग्यहीन

    भाग्यहीन ( Bhaagyaheen )   कहाँ  गए  रणछोड  द्रौपदी, पर  विपदा अब भारी है। रजस्वला तन खुले केश संग,विपद में द्रुपद कुमारी है।   पूर्व जन्म की इन्द्राणी अब, श्रापित सी महारानी है। पांच महारथियों की भार्या, धृत की जीती बाजी है।   हे केशव हे माधव सुन लो, भय भव लीन बेचारी है। नामर्दो…

  • मां

    मां   मां एक अनबूझ पहेली है, मां सबकी सच्ची सहेली है, परिवार में रहती अकेली है, गृहस्थी का गुरुतर भार ले ली है। ऐ मां पहले बेटी,फिर धर्मपत्नी, बाद में मां कहलाती हो। पहली पाठशाला,पहली सेविका तूं घर की मालकिन कहलाती हो।। बुआ,बहन,मामी,मौसी कहलाये, माता,दादी,नानी नाम बुलवाये, परिवार की जन्म दात्री नाम सुहाये, अबला,सबला,…

  • मेरी कलम से | डॉ. बी.एल. सैनी

    सप्ताह के सात रंग सोमवार का सूरज संग नया उत्साह लाए,आलस्य मिटे, कर्म का दीप जगमगाए।जीवन की डगर पर पहला कदम बढ़े,सपनों का कारवां उम्मीद से जुड़े। मंगलवार ऊर्जा का संचार करे,परिश्रम की ज्योति हर ओर भर दे।कठिन राहें भी सरल बन जाएं,साहस से हर मंज़िल कदमों में आएं। बुधवार का दिन सिखाए सादगी,ज्ञान की…

  • मैं गीत नहीं गाता हूॅ | Main Geet Nahi Gata Hoon

    मैं गीत नहीं गाता हूॅ ( Main geet nahi gata hun )   शब्दों का खेल रचाकर, मन अपना बहलाता हूॅ। मैं गीत नहीं गाता हूॅ। कवि कर्म नहीं कुछ मानूॅ, रचनाधर्मिता न जानूॅ, भावों की धारा में बह सुख से समय बिताता हूॅ। मैं गीत नहीं गाता हूॅ। मन दूर जगत से जाता, आनन्द…

  • आवारा धूप | Awara Dhoop

    आवारा धूप ( Awara dhoop )   धूप तो धूप ही होती है इस कोहरे ठंड से ठिठुरते शहर में धूप का इंतजार रहता है सबको कहीं से थोड़ी सी धूप मिले, सूरज सो गया है कंबल में लिपटकर, धूप को सुला लेता है, आगोश में अपनी , धूप सो जाती है, सूरज की बाँहो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *