Diwali geet

आओ हम दिवाली मनाएं

आओ हम दिवाली मनाएं

आओ हम-सब साथ मनाएं दीवाली त्यौंहार,
तमस की उमस दूर करें जलाएं दीप अपार।
जगमग कर दे घर ऑंगन हो समृद्धि बौछार,
सुखमय हो सबका जीवन महकें द्वार-द्वार।।

इसदिन ही संपूर्ण हुआ श्री राम का वनवास,
सीता-राम और लखन पधारे अपने निवास।
झिलमिल करते दीप-जलाएं पर्व बना ख़ास,
तब से चली आ रही परंपरा कार्तिक-मास।।

इस अमावश की रात्रि को करते प्रकाशवान,
संध्या को लक्ष्मी पूजा का है विशेष विधान।
वन्दना करते श्री गणेश एवम कुबेर भगवान,
तत्पश्चात प्रसाद बाॅंटते परिवार व मेहमान।।

भारत का सबसे प्रमुख ये आनंदमय त्यौहार,
रंगो से रंगोली बनाकर दर सजाते वंदनवार।
स्नेह तेल में रूई डालकर जलाते दीप कतार,
परदेशी भी घर आते मिलने अपने परिवार।।

रसोईघर में बनते इस दिन ढ़ेर सारे पकवान,
मीठा-नमकीन खाने से आती मुख मुस्कान।
बाज़ार से खरीदकर लाते वस्त्र और सामान,
चमचमाती लड़ी लगातें सजाते घर-दुकान।।

रचनाकार : गणपत लाल उदय

अजमेर ( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • शेर सिंह हुंकार की कविताएं | Sher Singh Hunkaar Poetry

    पीड़ा ना छेड़ो हमें हम सताए हुए हैं।कई राज दिल में छुपाए हुए हैं।ये सदियों की पीड़ा उभरने लगी हैं,जो हिन्दू हृदय में दबाए हुए हैं। हमे ना सीखाओ हमे ना दिखाओ।जुल्म क्या हैं होता हमें ना बताओं।जो हमने सहा हैं कहाँ वो लिखा हैं,मगर सच हमारा जहाँ को बताओ। जो दिल मे जख्म हैं…

  • बुद्धसिस्ट | Kavita Buddhist

    बुद्धसिस्ट  ( Buddhist )   बुद्ध विशुद्ध मुक्ति का मार्ग बुद्ध विशुद्ध ज्ञान का मार्ग बुद्ध थर्म नहीं धम्म है बुद्ध में मानव सम्म है मन तन वचन तीन ताप बुद्ध मत में तीन पाप बुद्ध शर्ण गच्छामि शुद्ध संस्कार धम्म शर्ण गच्छामि शुद्ध संस्कार संघ शर्ण गच्छामि मुक्ति दाता बुद्ध विशुद्ध ज्ञान ध्यान दाता…

  • दिव्य पूर्णिमा | Divya Purnima

    दिव्य पूर्णिमा ( Divya purnima )   पीयूष पान परम आनंद,जुन्हाई उत्संग में आश्विन मास दिव्य पूर्णिमा, अद्भुत अनुपम विशेष । चारु चंद्र चंचल किरणें, रज रज आह्लाद अधिशेष । शीर्ष कौमुदी व्रत उपासना, विमल भाव अतरंग में । पीयूष पान परम आनंद, जुन्हाई उत्संग में ।। सोम धार धरा समीप, अनूप दिव्य भव्य नजारा…

  • हाँ! मैं आसमान से बात करती हूँ

    हाँ! मैं आसमान से बात करती हूँ मैं वो लड़की हूँ —जो अक्सर रात की चुप्पियों मेंखुद से सवाल करती है:क्या मेरा होना बस एक समझौता है?या कोई पुकार है —जो इस सदी के शोर में गुम हो गई? मेरी हथेलियाँ खाली नहीं हैं,इन पर बिखरे हैं अधूरे ख्वाब,जो रोज़ सिले जाते हैंघर की चौखटों…

  • यक्ष प्रश्न | Yaksha Prashna

    यक्ष प्रश्न ( Yaksha Prashna )    परिवार हि समाज की वह इकाई है जहां से ,स्वयं समाज और देश का निर्माण होता है व्यक्ति ही एक मे अनेक और अनेक मे एक का प्रतिनिधित्व करता है…. प्रश्न तभी है की क्या एक व्यक्ति ही समाज का आधार है या,समाज ही व्यक्ति का ? हां,दोनो…

  • अन्नदाता की पुकार

    अन्नदाता की पुकार ******** हम अन्नदाता है साहब चलते हैं सदा सत्य की राह पर  करते है कड़ी  मेहनत चाहे कड़ी धूप य हो बारिश घनघोर कोहरा या हो कड़ाके की सर्दी दिन हो या काली रात खेतों में लगाता हूं रात भर पानी तब कहीं जाकर उगाता हूं अन्न सोता नहीं चैन की नींद…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *