दुआँ है ऊपरवाले
दुआँ है ऊपरवाले
दुआँ है ऊपरवाले तुमसे,
आने वाले साल में -2
सुखमय जीवन सबका बीते,
फँसे न अब जंजाल में -2
धारा बहे विकास की हरदम, खुशियाँ ऐसे बरसे हो, खुशियाँ ऐसे बरसे.
हरमन प्यार से झूमें, गाये ,
गम पाने को तरसे हो, गम पाने को तरसे.
हटे समस्या और गरीबी -2
मरे न कोई काल में, हो मरे न कोई काल में.
सुखमय जीवन सबका बीते, फँसे न अब जंजाल में.
नाम हो अपने देश का जग में,पूरे हों सब सपने,हो पूरे हों सब सपने.
जाति, धर्म के बंधन तोड़ें, सबको समझें अपने, हों सबको समझें अपने.
आगे मिलकर बढ़ें हम ऐसे, आगे मिलकर बढ़ें हम ऐसे,
क्या रखा है मलाल में, हों क्या रखा है मलाल में.
सुखमय जीवन सबका बीते, फँसे न अब जंजाल में.
दुआँ है ऊपरवाले…!!!

कवि : प्रीतम कुमार झा,
महुआ, वैशाली, बिहार
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