अटूट बंधन राखी | Rakhi par kavita

अटूट बंधन राखी

( Rakhi par kavita ) 

 

धागों का यह अटूट बंधन
पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन
सावन की पूर्णिमा आती
तिलक करे भाई का बहने

कलाई पर राखी बांधती
भाई करें रक्षा बहन की
है पवित्र प्यार का बंधन
अनमोल अटूट रक्षाबंधन

द्रोपदी के एक धागे की
लाज बचाई थी कृष्ण ने
कर्णावती ने भेजी राखी
मान रखा था हुमायूं ने

पहुंचे थे मेवाड़ बचाने
रोली अक्षत दीपक जला
मीठा राखी से थाली सजा
मुंह मीठा करवाती बहने

सूनी कलाई सजाती बहने
कामना लंबी उम्र की करे
भैया देता रक्षा का वचन
भाई बहन का प्यार राखी
पावन पुनीत त्यौहार राखी

 

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

पापा की यादें | Papa ki Yaadein

Similar Posts

  • प्यास बुझे तो बुझे कैसे | Pyaas bujhe to bujhe kaise | Kavita

    प्यास बुझे तो बुझे कैसे ( Pyaas bujhe to bujhe kaise )     प्यास बुझे तो बुझे कैसे , जो आग लगी है पानी से।   मर  रहा  इंसानियत  यहां, धर्म मजहब की कहानी से।   रो-रो  के  जिंदा  है  परिंदा, अपनी आंखों के पानी से।   घर  का  बुजुर्ग  शर्मिंदा  है, अपने बच्चों…

  • दादी माँ की मन्नत | Kavita Dadi Maa ki Mannat

    दादी माँ की मन्नत ( Dadi maa ki mannat )    माॅंगी जो हमनें मन्नत एक, रखना ईश्वर हम सबको एक। यह बैर किसी से हो नही पाएं, प्रेम-भाव से रहे हम सब सारे।। जैसे गुज़रें है अब तक दिन, आगे भी गुज़रें ऐसे ही दिन। सब कुछ दिया है आपने ईश्वर, आगे भी कृपा…

  • आंवला नवमी | Amla Navami

    आंवला नवमी ( Amla Navami )   सुख वैभव आरोग्य अक्षय,आंवला नवमी उपासना से कार्तिक शुक्ल नवमी महत्ता, सनातन धर्म पुनीत स्थान । मां लक्ष्मी विष्णु आमल वृक्ष, सर्वत्र पूजन वंदन आह्वान । स्वयं सिद्ध मुहूर्त अंतर्निहित , सद्यः फल व्रत साधना से । सुख वैभव आरोग्य अक्षय,आंवला नवमी उपासना से ।। भविष्य स्कंद पद्म…

  • निजी आजादी | Niji Zindagi

    निजी आजादी ( Niji zindagi )    गलत को गलत यदि कह न सको तो गलत का साथ भी गलत ही होगा स्वयं को निर्दोष समझने से पहले अपनी भूमिका भी माननी होगी… दुनियां के उसूलों के साथ चलना स्वयं को गुलाम बना लेना है विशिष्टता मे लोग अलग कुछ नही करते ढंग ही उनका…

  • ऐ जिंदगी तुझे | Aye zindagi

    ऐ जिंदगी तुझे ( Aye zindagi tujhe )   ऐ!जिंदगी ,बचपन से ही तुझे उलझते हुए देखा है पसीने से लथपथ पिता का शरीर देखा है मां की आंखों मे ममता का प्यार देखा है अमीरी और गरीबी में फरक देखा है जमीन से खड़े होकर फलक देखा है खुद को हमेशा आंसुओं से तरबतर…

  • नया दौर | Kavita Naya Daur

    नया दौर ( Naya Daur )   इतना बेरुख जमाना हो गया मुसकुराना तक गुनाह हो गया जजबातों का जमाना अब कहां हर इक शय अंजाना हो गया खून की नदियां कहा करती है दुश्मन अपना जमाना हो गया आखों में किसी के खुशियां कहा दर्द का ये पैमाना फसाना हो गया मिटा मजहब की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *