अनमोल तोहफा

अनमोल तोहफा : बाल कहानी

न्यू ईयर चार दिन बाद आने वाला था। 10 वर्षीय राजू की मम्मी सन्ध्या का बर्थडे इत्तेफाक से न्यू ईयर पर ही पड़ता था। अपनी मम्मी के जन्मदिन पर राजू ने अपनी मम्मी को गिफ्ट देने का प्लान बनाया। उसने बातों बातों में अपनी मम्मी से पूछा:-
“मम्मी जी, इस न्यू ईयर पर आपके जन्मदिन के अवसर पर मैं आपको क्या गिफ्ट दूँ।”

“मुझे कोई गिफ्ट वगैरह नहीं चाहिए, मेरे बालक बच्चें बनें रहें, स्वस्थ रहें.. हरदम भगवान से मैं बस यही प्रार्थना करती हूँ।” माँ बोली।

“नहीं मम्मी जी, मैं तो आपको गिफ्ट ही दूँगा। जल्दी बताओ, क्या दूँ आपको? इस तरह बातें बनाना बन्द करो और मुझे जवाब दो।” राजू बोला।

“जो भी मैं माँगूंगी, क्या सच में तू मुझे दे सकेगा? सोच ले।”

“बिल्कुल, मैं पूरी कोशिश करूंगा, आपको गिफ्ट देने की। आप भी तो मेरी हर मनोकामना पूरी करती हो। अब मेरी बारी है। लेकिन मम्मी जी…?”

“लेकिन क्या राजू?”

“मैंने पूरे साल एक एक रुपया जोड़कर सिर्फ 300 रुपये इकट्ठा किये है ताकि आपको उपहार दे सकूँ.. इससे ज्यादा का उपहार मैं नहीं दे सकूँगा। इसलिए आप वही गिफ्ट मांगना जो इतने रुपये में आ सके।” संकोच के साथ राजू बोला।

“मेरा प्यारा बच्चा, मेरे लिए कितना कुछ करता है। लेकिन मेरे राजू.. मुझे रुपयों वाला गिफ्ट नहीं चाहिए।”

“बिना रुपयों के भला कोई गिफ्ट मिलता है क्या बाज़ार में? आप भी कमाल करती हो मम्मी जी”

“बेटा, बाज़ार में मिलने वाली चीजों का मोल होता है, लेकिन जो चीजें बाजार में नहीं मिलती… जो सिर्फ हमारे अपने ही हमें दे सकते हैं वो चीज़ें फ्री होने के बावजूद बेहद अनमोल होती हैं.. अगर हम गिफ्ट न देकर उन्हें दें तो परिवार स्वर्ग से सुंदर बन जाये, सब लोग आपस में मिलजुल के रहें, एक दूसरे से प्रेम करें।”

“मम्मी जी, क्या ऐसा भी कोई गिफ्ट होता है क्या?”

“प्यार, आदर-सम्मान, अपनापन, सहयोग, समर्पण, सच्चाई, ईमानदारी, वफादारी आदि कुछ ऐसे ही गिफ्ट हैं जिनसे जिंदगी खुशहाल बनती हैं। इसके अतिरिक्त हम अपनी बुरी आदतों जैसे आलस्य करना, समय पर पढ़ाई न करके खेलते रहना, झूठ बोलना, चोरी करना, गुस्सा करना, लड़ना-झगड़ना, समय पर काम न करना, ईर्ष्या करना, साफ सफाई न रखना इत्यादि बुराइयों को त्यागकर हम अपने चाहने वालों को खुशियां दे सकते हैं।

बेटा राजू तुम हर मामले में अच्छे हो लेकिन… तुम्हारे अंदर गुस्सा करने और झूठ बोलने की गन्दी आदत है। हम सब परिवार के लोग तुम्हारी इस आदत की वजह से बहुत बार परेशान हो जाते हैं। तुम्हें अपनी इन बुराइयों को त्यागना होगा। अगर तुमने अपनी इन बुराइयों को त्याग दिया, काबू पा लिया तो… मैं मानूँगी कि मुझे मेरा बर्थडे गिफ्ट मिल गया है। इसके अलावा मुझे तुझसे कुछ नहीं चाहिए। अपने ये रुपये बचा कर रख, भविष्य में काम आएंगे। बोल दे सकेगा मुझे ये अनमोल उपहार?”

“ठीक है मम्मी जी, मैं पूरी कोशिश करूँगा कि मैं गुस्सा करना और झूठ बोलना छोड़ दूँ। लेकिन एक वायदा आप भी मुझसे करो कि तुम मेरे सच बोलने पर कभी नाराज़, गुस्सा नहीं होओगी। मुझे डाँट नहीं लगाओगी। कई बार आप मुझे समझ नहीं पाती तब मुझे अपनी बात कहने को.. मजबूरी में झूठ का सहारा लेना पड़ता है। मैं जानता हूँ कि यह गलत है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।” राजू ने भी माँ की गलती बताते हुए कहा।

“ठीक है बेटा, अच्छा हुआ, तूने मुझे बताया कि मैं कहाँ गलत हूँ। समझ सकती हूँ कि मेरी नाराज़गी को ध्यान में रखते हुए, मजबूरी में तुझे बहुत बार झूठ बोलना पड़ा होगा कई बार। अब ऐसा नहीं होगा। मैं भी तुझे समझने की कोशिश करूँगीऔर गुस्सा नहीं होउंगी।” माँ ने आश्वासन दिया।

“अगर ऐसा है तो…ये समझ लो मम्मी जी, आपके राजू ने आपको उपहार दे दिया।” राजू ने इतराते हुए कहा।

“मेरा प्यारा, अच्छा बेटा राजू” यह कहकर माँ ने राजू को अपने सीने से लगा लिया।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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