सोचो नया कुछ करने की

सोचो नया कुछ करने की

सोचो नया कुछ करने की

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वर्ष नया है
तुम भी सोचो
नया नया कुछ करने की।
करो सामना चुनौतियों की,
समय यही है लड़ने की;
मुसीबतों से नहीं डरने की।
कलम उठाओ,
रफ़्तार बढ़ाओ;
झटके में एक सीढ़ियां चढ़ जाओ।
पहुंच मंजिल पर थोड़ा सुस्ता लेना
रास्ते में थक बैठने की-
न किसी से सलाह लेना।
यही बेचैनी तुमको-
ऊपर तक ले जाएगी,
तुम पर हंसने वालों की-
पीढ़ियां पछताएंगी!
दूसरों की गलती में न उलझो,
अपनी कमियों के हल ढ़ूंढ़ो।
यही सफलता की कुंजी है,
कठिन श्रम से मिलती यह पूंजी है।
वर्ष नया है,
तुम भी सोचो;
नया नया कुछ करने की।

 

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नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

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