लौटेगी कुछ दिन में

‘लौटेगी कुछ दिन में’

आंखों में खुशी मन में कुंभ की छाया बसी थी।

लौटूंगी कुछ दिन में घर की,की व्यवस्था थी।

निकल पड़ी गंगा मैया का नाम लेकर, आंखों में बस चंचलता थी।

कुंभ नहाने के लिए छोड़ी उसने अपनी गली बस्ती थी।

क्या मालूम था उसे की कुंभ में सांसें बडी सस्ती थी।

आस्था तो सच्ची थी मगर व्यवस्था बड़ी कच्ची थी।

आस्था तो सच्ची थी मगर व्यवस्था बड़ी कच्ची थी।

भगदड़ में ऐसी बिखरी सांसे कुछ अटकी थी।

ढूंढ रही थी आंखें अपनों को हिम्मत उसकी टूट चुकी थी,

ढूंढ रही थी आंखें अपनों को हिम्मत उसकी टूट चुकी थी।

भाग्य के इस खेल में वह पगली हार चुकी थी।

गंगा मैया की गोद में वह समा चुकी थी

आस्था तो सच्ची थी मगर व्यवस्था बड़ी कच्ची थी

लेखिका :- गीता पति ‌(प्रिया)

( दिल्ली )

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • Kavita Chandrawar | चंद्रवार का गृहकार्य

    चंद्रवार का गृहकार्य ( एक विलोमपदी )   टेक धन लोलुप भेड़ियों के झुंड में प्रजातंत्र, अकेली भेड़ सा घिर गया है। आदर्शवाद की टेक पर, चलते – चलते, कटे पेड़ सा गिर गया है। मुट्ठी भर सत्पुरुष लजा- लजा कर सिर धुन रहे हैं, और अनगिनत कापुरुष राजा, नित नया जाल बुन रहे हैं।…

  • नगर सेठ रामदेव बाबा | Baba Ramdev Pir

    नगर सेठ रामदेव बाबा ( Nagar Seth Ramdev Baba )    धरा नवलगढ़ शहर प्यारा बाबा रामसापीर हमारा। नगर सेठ रामदेव बाबा तेरे दर पे लगता भंडारा। लीलो घोड़ो धवल ध्वजा मंदिर बाबा आलीशान। दूर-दूर से आवे जातरी भक्त करते तेरा गुणगान। भादवा सुदी दशमी मेला झूला लगे सजे बाजार। दीप ज्योति जगे उजियारा भरा…

  • गौरी नन्दन | Gauri Nandan

    गौरी नन्दन ( Gauri Nandan ) प्रभात वेला~ गणेश जी की होती प्रथम पूजा • गौरी नन्दन~ रिद्धि सिद्धि के दाता करूँ वन्दन • संकट हर्ता~ मूषक की सवारी सुख प्रदाता • गणाधिराज~ मिटा दो दुनिया से कोरोना राज • जगनायक~ जगत में हो शांति हे! विनायक • निर्मल जैन ‘नीर’ ऋषभदेव/राजस्थान यह भी पढ़ें…

  • अरज सुनो माते | Araj Suno Mate

    अरज सुनो माते ( Araj Suno Mate ) हर जनम तुमको मनाती। सर्वस्व को मैं हूँ पाती। इस जनम भी मिला दो मांँ। प्रभु चरण घर दिला दो मांँ । प्राण हीन मैं उनके बिना । मर-मर हो रहा है जीना। खुशी के प्रसुन खिला दो मांँ । प्रभु चरण घर दिला दो मांँ ।…

  • काव्य मिलन | Kavita Kavya Milan

    काव्य मिलन ( Kavya Milan )   माँ-बाप से बढ़कर, हमें करता कोई प्यार नहीं, उनसे ही वजूद हमारा उनके बिना संसार नहीं, हाथ पकड़कर चलना वो ही हमें सिखलाते हैं, उनसे ज़्यादा इस दुनिया में और मददगार नहीं, जब-जब चोट हमें लगती मरहम वो बन जाते, तबीब भी कोई उनके जैसा है तर्जुबेकार नहीं,…

  • उम्मीदों भरा नया साल

    उम्मीदों भरा नया साल उम्मीदों भरा नया सालखूब आता है मन में ख्याल।ढेर सारी आशाएं हैंजिंदगी की अभिलाषाएं हैं ,शायद जिंदगी हो जाए खुशहालउम्मीदों भरा नया साल।।अधूरे सपने इस साल हों पूरेवक्त बुरा कब तक, जब हम नहीं है बुरेखुशियां जरूर मिलेंगीजिंदगी जरूर खिलेगी ,बदलेगा मौसम का हालउम्मीदों भरा नया साल।।किस्मत कब तक रुलाएगीइस बार…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *