शुद्ध चिंतन आत्म मंथन

शुद्ध चिंतन आत्म मंथन

हम यह किस दौर की तरफ जा रहे हैं? अगर पहले के समय की बात करें तो हमारे पूर्वजों में हमारी माताएं अपने पति को ‘ए जी ‘ ‘ओ जी’  ‘सुनिए जी ‘ कहती थी। उसे भी आजकल की थर्ड क्लास रील ने इतना गंदा मतलब बना दिया कि इसका मतलब होता है ए गधे/ ओ गधे / सुन गधे और कमाल की बात यह है कॉमेडी के नाम पर ये फूहड़पन चल रहा है। लोग ठहाका लगाकर हँस रहे हैं। मंचों पर कवि  भी इस तरह की बातें कर रहे हैं।

कुछ दशक पहले की अगर मैं बात करूं तो  कपल एक दूसरे को ‘जानू’ ‘सोना’ ‘स्वीटी’ कहते थे। यहाँ तक फिर भी ठीक था। आज के दौर में पति-पत्नी एक दूसरे को ‘बाबू’  ‘बेबी’  कहते हैं…. और अब तो ‘बच्चा’ कह रहे हैं… कभी किसी ने यह नहीं सोचा कि जब वे दूसरे को ‘बच्चा’ कह रहे है तो उनके बच्चे उन्हें क्या कहेंगे ?? इसी का नतीजा है कि बच्चे आजकल माँ-बाप का नाम ले रहे हैं!

 यही आजकल के डेली सोप में और टीवी ऐड में दिखा रहे हैं। माँ को नाम से बच्चा पुकारता है। एक माँ को दो नाम से बताया जाता है माँ बच्चे को दूध पीने के लिए कहती है, थोड़ी सख़्ती बरतती है और. वहीं ‘जानू’ मस्ती करना सिखाती है ।

जहॉं पहले हम लोग माता-पिता को ‘माँ- बाबूजी ‘ ‘मैया-बापू’ ‘मम्मी-डैडी’ कहते थे, वहाँ आजकल माँ-बाप ‘इसीमा’ और ‘पॉप्स’ में सिमट कर रह गए हैं!  पता नहीं आगे और क्या-क्या देखने को मिलेगा, मेरा तो दिल सोच कर ही घबरा रहा है!!

छोटे पर्दे  की मैं बात करूँ  तो पर ”भाभी जी घर पर है” और “तारक मेहता का उल्टा चश्मा” कॉमेडी के नाम पर इन्होंने तहलका मचाया है। मानता हूँ इन सीरियल से कभी कभार कुछ अच्छी बातें भी सीखने की मिली होंगी। लेकिन यह दोनों सीरियल एक ही चीज के इर्द-गिर्द  घूमते हैं।

अगर “भाभी जी घर पर है” सीरियल कि बात करूँ तो इसमें यही दिखाते हैं विभूति नारायण जिनकी इतनी सुंदर पत्नी है अनीता जी, उनके होते हुए भी वह अपनी पड़ोसन अंगूरी भाभी को पसंद करते हैं। दिल ही दिल में उन्हें चाहते हैं। उनके घर पर जाने के हमेशा बहाने ढूंढते है।

वहीं दूसरी तरफ भी ऐसा ही हो रहा है। अंगूरी भाभी के पति मनमोहन तिवारी जी अनीता भाभी को पसंद करते हैं। उन्हें देवी मानते हैं, मन ही मन चाहते है और इसे वे पूजा समझते हैं।  हम हमारे बच्चों के साथ बैठकर यह देख रहे हैं।

“तारक मेहता का उल्टा चश्मा” सीरियल की बात करूँ तो जेठालाल एक बच्चे के पिता होते हुए भी,  उनकी धर्मपत्नी दया के होते हुए भी उन्हें बबीता जी बेहद पसंद है।

लेकिन यह दोनों जो फैमिली सीरियल है और  हमारे बच्चों को एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स करना सीखा रहे हैं!!

 सिर्फ यह दो धारावाहिक ही नहीं बल्कि 50% धारावाहिक इस तरह के बने हुए हैं जो नारी के चरित्र पर कीचड़ उछाल रहे हैं। हम कभी जो सोच भी नहीं सकते उन्हे वैसा बता रहे हैं । सीरियल के अंदर ही एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स बताते हैं। एक-एक आदमी की दो दो तीन तीन शादियाँ हो चुकी है। उसके बाद भी दोनों पत्नियाँ उसके साथ रह रही है। कहीं दो अलग-अलग घर में कहीं पर एक ही घर में!  पता नहीं कौन इनके कहानीकार होते हैं कौन ऐसी कहानी लिखते हैं मैं समझ नहीं पाता हूँ …

अगर ऐड की बात करूँ तो इनका एक ही बात पर फोकस होता है कि आपको कामयाब होने के लिए मेहनत या लग्न की जरूरत नहीं है गुटखा और शराब में वह ताकत है जो आपको कामयाब बनाएगी।

इस बात को वो लोग साधारण तरीके से नहीं बताते हैं। बल्कि बड़े-बड़े सेलिब्रिटी को लेकर एक भव्य रूप देकर इस तरह से जताते हैं कि जैसे ऐसे पदार्थ के बिना तो जीवन ही अधूरा है…. या फिर इनका सेवन न करने पर हमें सफलता  प्राप्त नहीं  होगी।

 सर्जन अच्छे से ऑपरेशन नहीं कर पाते हैं क्योंकि वह अच्छे से ब्रश करके नहीं आए हैं। सर्जरी के बीच में उन्हें नर्स टूथपेस्ट लाकर देती है और ब्रश करने के लिए कहती है।

 मतलब ऐड वाले कुछ भी दिखा रहे हैं और पैसा कमा रहे हैं और जनता को बेवकूफ बना रहे हैं। जिन भद्दी अश्लील एड को बैन कर देना चाहिए वह ऐड माँ-बाप को मज़बूरी में बच्चों के सामने बैठकर देखनी पड़ रही है!!!

सबसे कमाल की बात यह है क्रिकेट मैच के दौरान ऐसी ऐड नहीं आती है ऐसी ऐड डेली सोप  के बीच में ही आती है।.जबकि उस वक्त पूरा परिवार साथ में बैठकर टीवी देख रहा होता है। कितनी बार इंसान रिमोट हाथ में लेगा? कितनी बार  चैनल बदलेगा?  चुपचाप सिर झुका कर सभी को ऐड देखनी ही पड़ती है!

 इन सब बातों को अगर एक बार साइड में रख दें या नज़रअंदाज कर दें तो भी वेब सीरीज के नाम पर जो हमारी युवा पीढ़ी के ज़हन में ज़हर घोला जा रहा है, उस पर तो निस्संदेह सभी को आवाज़ उठानी ही चाहिए।

 वेब सीरीज ने सारी हदें  ही पार कर दी है। कोई भी मूवी बनती  है तो उसे सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलता है। उसके अकॉर्डिंग एज डिसाइड होती है कि कौन सी एज के लोगों इसे देख सकते हैं।  लेकिन आजकल वेब सीरीज ने इतना कचरा कर दिया है कि छोटे-छोटे बच्चे भी ऐसी चीज देखने लगे हैं जिनके बारे में बात भी नहीं कर सकते हैं।

 मैं भारत सरकार से एक ही अपील करना चाहूँगा जब आप जीएसटी लागू करवा सकते हैं , जब रातों-रात नोटबंदी हो सकती है, जब लॉकडाउन लग सकता है तो फिर यह वेब सीरीज बंद क्यों नहीं हो सकती??? हमारे देश का, हमारी संस्कृति का, हमारी सभ्यता का वेब सीरीज की वज़ह से पतन हो रहा है! 

 भारत की कसीनो कंपनी आज हमारी युवा पीढ़ी को प्रिडिक्शन के नाम पर सट्टा खेलने को उकसा रही है। जब खेल कर ही पैसे कमा लेंगे  तो फिर मेहनत कौन करेगा और  क्यूँ करेगा??

लेकिन कोई भी इन सब बातों के खिलाफ आवाज़ नहीं उठा रहा है। आगे परिणाम और भयानक होने वाला है।

 सुमित मानधना ‘गौरव’

सूरत ( गुजरात )

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#atulsubhash

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