बहादुरी ( लघुकथा )

बहादुरी ( लघुकथा )

एक नवयुवक ने गुरुजी से सवाल किया:- “ऐसा क्या है जिसे मांगने में बहादुरी चाहिए?”

गुरुजी:- “मदद…”

नवयुवक:- “वो कैसे?”

गुरुजी:- “क्योंकि मदद मांगना… हार मानना नही होता, बल्कि मदद मांगना बहादुरी होती है। इसके लिए बहुत हिम्मत चाहिए होती है। बहुत बार लोग हिम्मत नहीं दिखाते, मदद मांगने से परहेज करते हैं, उन्हें शर्म आती है, नतीजतन वे अपनी स्थिति दुर्गम कर लेते हैं।

खुद को और भी ज्यादा दिक्कत में डाल लेते हैं। फिर एक दिन परेशान होकर, जिंदगी से मायूस होकर गलत कदम उठा लेते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। हमें बचपन से ही अपने बच्चों को गलती होने पर सॉरी बोलना, गलती पर माफ करना, अगर कोई हमारे लिए अच्छा करे तो उसका धन्यवाद अदा करना, और जरूरत पड़ने पर अपने दोस्तों से, परिवार से, शुभचिंतकों से मदद मांगने में देरी न करना, परहेज न करना सिखाना चाहिए।

ये बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन सब बातों को जिंदगी में अपनाकर हम अपनी जिंदगी आसान और खुशहाल बना सकते हैं। ध्यान रखें कि जब हालात हमारे बस के बाहर हो जाते हैं तब हमें उन पर ध्यान देना चाहिए जो हमारे अपने होते हैं। किसी ने क्या खूब कहा है- “ये वक़्त भी गुजर जायेगा।”

गुरुजी ने गहरी सांस लेकर आगे कहा:-
“बेटा, ‘ये वक्त भी गुज़र जायेगा’ एक बहुत ही शक्तिशाली वाक्यांश है जो हमें जीवन की अस्थिरता और परिवर्तनशील प्रकृति को याद दिलाता है। यह हमें धैर्य, आशा और आत्मविश्वास के साथ जीवन के उतार-चढ़ावों का सामना करने के लिए प्रेरित करता है।

जैसे रात के बाद दिन आता है, वैसे ही दुख के बाद सुख और सुख के बाद दुख। वर्तमान में चल रहा समय, चाहे वह सुखद हो या दुःखद, निश्चित रूप से एक दिन समाप्त हो जाएगा। यह समय भी गुजर जाएगा।”

गुरुजी की गहरी ज्ञान की बातें सुनकर नवयुवक की समस्या/जिज्ञासा का समाधान हो गया।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • डॉक्टर साहब का संघर्ष | लघुकथा

    एक अस्पताल में नर्स और डाक्टर की कहा सुनी चल रही थी – नर्स ने बड़े गुस्से से मेज पर फाइल पटक कर कहा- आप भी सफेद कोट पहनते हो मैं भी सफेद कोट पहनती हूँ, जितना काम आप कर लेते हो उससे कहीं ज्यादा काम मैं भी कर लेती हूँ- पता नहीं आप लोग…

  • कर भला, हो बुरा

    टिंकू एक पिज़्ज़ा डिलीवरी बॉय हैं। उनकी शादी अब से 5 वर्ष पहले प्रिया कुमारी से हुई थी। प्रिया शादी के बाद भी पढ़ना चाहती थी, तो टिंकू ने बिना किसी हिचकिचाहट के 2.5 लाख का लोन लिया और शकुंतला नर्सिंग कॉलेज में उसका एडमिशन करवा दिया। टिंकू ने सोचा कि कुछ पैसे लगेंगे तो…

  • अनमोल तोहफा : बाल कहानी

    न्यू ईयर चार दिन बाद आने वाला था। 10 वर्षीय राजू की मम्मी सन्ध्या का बर्थडे इत्तेफाक से न्यू ईयर पर ही पड़ता था। अपनी मम्मी के जन्मदिन पर राजू ने अपनी मम्मी को गिफ्ट देने का प्लान बनाया। उसने बातों बातों में अपनी मम्मी से पूछा:-“मम्मी जी, इस न्यू ईयर पर आपके जन्मदिन के…

  • ट्यूशन | Tuition

    मेरे पिता जी का ट्रांसफर जलालाबाद ( थानाभवन) से बदायूं हो गया,बदायूं के पास एक छोटा सा गाँव था तातागंज, वहाँ मैं कुछ दिन ही रहा,मेरे पापा डॉक्टर थे, नीचे अस्पताल था ऊपर मकान जिसमें हम लोग रहते थे। मकान की ख़ाशियत ये थी की दरवाज़े तो थे पर कुंडी नहीं थी,उस गाँव में मुझे…

  • गाड़ी बुला रही है

    और अंततः वो छुक छुक गाड़ी बंद हो ही गयी.. पिछले करीब एक सो पच्चास सालो से अनवरत चलने वाली मिटर गेज रेल गाड़ी ने साल 2016 के अंतिम दिन अपना अंतिम सफर पूरा किया। नए साल का पहला दिन पूरी शांति के साथ बिता.. बीते डेढ़ सौ वर्षो का शौर थम गया.. स्टेशन खामोश…

  • श्राद्ध तर्पण | Shradh Tarpan

    आलेख श्राद्ध तर्पण मुख्य रूप से गृहस्थ द्वारा किए जाने वाले ब्रम्ह यज्ञ, देव यज्ञ , पितृ यज्ञ, अतिथि यज्ञ तथा बलिवैश्व यज्ञ में पितृ यज्ञ के अंतर्गत आता है। पितृ यज्ञ जीवित माता-पिता, आचार्य, विद्वान मनुष्य आदि की सेवा है। इस यज्ञ के श्राद्ध तर्पण दो भाग हैं। श्राद्ध तर्पण मृतक का नहीं बल्कि…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *