Abhivyakti Path

अभिव्यक्ति पथ | Abhivyakti Path

अभिव्यक्ति पथ

( Abhivyakti path ) 

 

अभिव्यक्ति पथ मनोज्ञ, प्रियम्वदा शब्द श्रृंगार से

हिय चिंतन नैतिक सहज
भाव सकारात्मकता ओतप्रोत ।
यथार्थ अवबोधन संबोधन ,
पटाक्षेप झूठ पाखंड श्रोत ।
कारण प्रभाव परिणाम अहम,
संप्रेषण उपमा अमिय सार से ।
अभिव्यक्ति पथ मनोज्ञ, प्रियम्वदा शब्द श्रृंगार से ।।

वय लिंग समूह शिक्षा ज्ञान,
परम घटक संवाद सेतु ।
मान सम्मान मर्यादा ध्यान,
हर कदम भव्य मुस्कान हेतु ।
अभिनंदन लोक संस्कृति संपदा,
नेह स्पंदन प्रस्तुति आधार से ।
अभिव्यक्ति पथ मनोज्ञ, प्रियम्वदा शब्द श्रृंगार से ।।

व्यवहार अंतर सदाचरिता ,
उच्चारण रोह सदा सरल ।
अस्त पाषाणी द्विअर्थ छवि,
अधिगम स्तर मृदु तरल ।
प्रेरणा पुंज शब्द प्रकाश,
शोभित स्वर आनंदिता आकार से ।
अभिव्यक्ति पथ मनोज्ञ, प्रियम्वदा शब्द श्रृंगार से ।।

स्नेहिल बंध परिवार समाज ,
अपनत्व सृजन शीर्ष बिंदु ।
वंदन पुरात्तन संस्कारिता,
वर्तमान धार सामंजस्य सिंधु ।
जनमानस चेतना परम बिंब ,
सर्वत्र खुशियां शब्दावली बहार से ।
अभिव्यक्ति पथ मनोज्ञ, प्रियम्वदा शब्द श्रृंगार से ।।

 

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

यह भी पढ़ें :-

कुंभलगढ़ दुर्ग | Kumbhalgarh Durg

Similar Posts

  • 78वाँ स्वतंत्रता दिवस | 78th Independence Day

    78वाँ स्वतंत्रता दिवस ( 78th Independence Day ) आजादी पर्व पर चेतन निज घट में रमना हैं । क्या खोया क्या पाया उसका चिन्तन करना हैं । आजादी पर्व पर चेतन – ।।ध्रुव ॥ हमारा अवचेतन मन है ऐसा संग्राहलय । जिसे कहते है सुचिन्तित विचारों का आलय।। आजादी पर्व पर चेतन – ।।ध्रुव ॥…

  • रंगों का त्यौहार है होली

    रंगों का त्यौहार है होली खुशियों का इजहार है होली ,रंगों का त्यौहार है होली ॥ जिसके प्रियतम पास नहीं हैं,उसके लिए अंगार है होली । सच हो जाते जिसके सपने ,उसके लिए बहार है होली । रंग रंगीला जीवन जिसका ,उसके लिए बहार है होली । जहाँ वक्त पर रोटी मुश्किल ,वहाँ पर खड़ी…

  • उपेक्षा | Upeksha

    उपेक्षा ( Upeksha  )   गहरी जड़ें कारण होती हैं आसमान में वृक्ष के मजबूती से उठ खड़े होने में गहरी नींव कारण होती हैं धरती पर घर के मजबूती से उठ खड़े होने में गहरी अंधेरी कारण होती हैं हृदय में डर के मजबूती से उठ खड़े होने में गहरी ख़ामोशी कारण होती हैं…

  • कलमकार मस्ताना | Kavita kalamkar mastana

    कलमकार मस्ताना ( Kalamkar mastana )   मैं देशप्रेम दीवाना हूं मैं कलमकार मस्ताना हूं रंगों की लेकर छटा गीतों का मधुर तराना हूं   केसरिया ले निकला माटी का तिलक किया मैंने देशप्रेम में झूम पड़ा मैं कागज कलम मेरे गहने   सद्भावौ की धारा में जब गीत सुहाने गाता हूं राष्ट्रधारा अलख जगाते…

  • भज ले राम | Bhaj le Ram

    भज ले राम ( Bhaj le Ram ) यह तो है माया का संसार। प्रभु नाम ही एकमात्र आधार। कर देता नैया भव से पार। रे बंदे! भज ले राम,भज ले राम, भज ले राम, रे बंदे! भज ले राम। कौन सुख ढूंढे बोल यहाँ तू? धधकता आग जगत ,इसे न छू। भस्म कर सब…

  • वशीकॄत खामोशी | Vashikrit Khamoshi

    वशीकॄत खामोशी ( Vashikrit Khamoshi )    अनिश्चित अपरिचित भयावह सी खामोशी गहरे छाप छोड़ और हावी होकर मेरे अन्तर्मन पर मुझे धकेलने की कोशिश करती पश्चाताप और ग्लानि के निर्जन कुंए में.. अनियंत्रित अदमित जुनूनी सी मोहब्बत अमानचित्रित और निषेधित करती खामोशी के चिन्हों को वशीकरण से रूह को तर जाने के लिए प्रेेम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *