अच्छे मूल्यों की शिक्षा

अच्छे मूल्यों की शिक्षा

एक छोटे से गाँव में एक छोटा लड़का रहता था, जिसका नाम रोहन था। रोहन के माता-पिता उसे बहुत प्यार करते थे और उसे अच्छे मूल्यों की शिक्षा देना चाहते थे। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि किस तरह रोहन को अच्छा लड़का बनाया जाए, उसमें अच्छे संस्कार डाले जाएं।

अचानक रोहन के पिता सोहन को अपने दोस्त अरुण शर्मा जी का ध्यान आया। वे करीब में ही रहते थे। उन्होंने रोहन को कुछ दिनों के लिए अरुण शर्मा जी के पास छोड़ने का फैसला किया। अरुण शर्मा भी अपने दोस्त की मदद के लिए तैयार हो गए।

उसी दिन, रोहन के पिता ने उसे अरुण शर्मा की एक छोटी सी किराना दुकान पर ले जाने का फैसला किया। दुकान के मालिक अरुण शर्मा एक बहुत ही अच्छे और अनुभवी व्यक्ति थे।

अरुण शर्मा ने रोहन को दुकान के काम में मदद करने के लिए कहा। रोहन ने बहुत उत्साह से काम करना शुरू किया, वह ग्राहकों को सामान देने में उनकी मदद करने लगा… लेकिन जल्द ही उसने एक गलती कर दी।

उसने एक ग्राहक को गलत सामान दे दिया, जिससे ग्राहक बहुत नाराज हो गया। रोहन को बहुत शर्म आयी। अरुण शर्मा ने रोहन को समझाया कि गलतियाँ करना स्वाभाविक है, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि हम उनसे कैसे सीखते हैं और आगे बढ़ते हैं। उन्होंने रोहन को सॉरी बोलने और ग्राहक को सही सामान देने के लिए कहा। रोहन ने ऐसा ही किया और ग्राहक को सही सामान दिया। ग्राहक ने रोहन की माफी स्वीकार कर ली और उसे एक अच्छा लड़का बताया।

अरुण शर्मा ने रोहन से स्कूल और परिवार के बारे में बातचीत की तथा उसको समझाते हुए कहा कि दोस्तों व परिवार के साथ चीजों को शेयर करना, मिलजुलकर रहना भी बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने रोहन को अपने दोस्तों के साथ अपने खिलौने शेयर करने के लिए कहा।

अगले दिन जब रोहन स्कूल गया तो उसने ऐसा ही किया और अपने दोस्तों के साथ अपने खिलौने शेयर किए, उनके साथ खेला। इससे उसके दोस्त बहुत खुश हुए और उन्होंने रोहन को एक अच्छा दोस्त बताया।

शाम को रोहन ने अरुण शर्मा को खुश होकर बताया कि आपके कहे अनुसार वह घर से ढेर सारे खिलौने स्कूल लेकर गया। वह अपने सहपाठियों के साथ खिलौनों से खेला और उनके साथ खाना भी शेयर करके खाया। यह सब करके उसे बहुत अच्छा लगा।

इस बार अरुण शर्मा ने रोहन को अगली अच्छी आदत के बारे में बताया और समझाते हुए कहा कि जिंदगी में असफलता का सामना करना और उससे सीख लेना भी बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने रोहन को एक छोटी सी प्रतियोगिता में भाग लेने की सलाह दी।

अरुण शर्मा अंकल की सलाह के अनुसार रोहन ने स्कूल की दौड़ प्रतियोगिता में भाग लिया, लेकिन वह जीत नहीं पाया। वह उदास था। शाम को उसकी उदासी का कारण जान अरुण शर्मा अंकल ने रोहन को समझाया कि असफलता से सीख लेना और आगे बढ़ना ही जीवन का सच्चा अर्थ है।

खेल में जीत हार तो लगी रहती हैं। प्रतियोगिता में भाग लेना, जीतने से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। हमें अपनी हार से सबक लेकर जीतने की कोशिश करनी चाहिए। रोहन ने अरुण शर्मा की बातों को ध्यान में रखा और आगे बढ़ने के लिए, गलतियों से सबक लेकर फिर से उसने मेहनत करनी शुरू कर दी। अगली बार जब दौड़ प्रतियोगिता हुई तो रोहन ने उसमें प्रथम स्थान प्राप्त किया।

इस तरह, रोहन ने अरुण शर्मा अंकल जी के सम्पर्क में रहकर बहुत कुछ सीखा और अपने जीवन में अच्छे मूल्यों को अपनाया। इस तरह एक अच्छा लड़का बनकर, अच्छी आदतें अपनाकर रोहन ने अपने माता-पिता को गर्व महसूस कराया।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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