Krishna Kavita Hindi

ऐसा एक दिन आएगा

ऐसा एक दिन आएगा

गोकुल में जन्म लेंगे कान्हा
कारागार पछताएगा
ऐसा एक दिन आएगा

इस देश की तरह पुण्य मय होगी
राम होंगे हृदय में मन कान्हा हो जाएगा
ऐसा एक दिन आएगा

न्याय के लिए ना भगाना होगा
गरीब अमीर सबको बराबर इलाज मिल जाएगा
ऐसा एक दिन आएगा
हां ऐसा एक दिन आएगा

 नवीन मद्धेशिया

गोरखपुर, ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • मैं चाहता हूं बस तुमसे | Prem kavita in Hindi

       मैं चाहता हूं बस तुमसे ( Main chahta hun bas tumse )   मैं चाहता हूं बस तुमसे थोड़ा सा प्यार थोड़ा-सा मन थोड़ा-सा सुकून थोड़ा-सा अहसास।   मैं तुमसे चाहता हूं बस थोड़ी-सी हँसी थोड़ी-सी खुशी थोड़ी-सी बातें थोड़ी-सी शान्ति।   मैं तुमसे चाहता हूं बस थोड़ा-सा दर्द थोड़ा-सी तकलीफ़ थोड़ी-सी बैचेनी थोड़ी-सी…

  • दहलीज | Dahaleej

    दहलीज ( Dahaleej )    फर्क है तुमने और तुम्हारी बातों मे समझ ही न पाए कई मुलाकातों में मिले हो हर बार नए ही अंदाज मे उजाला हो जैसे दिन और रातों मे कभी गुरुर तो कभी शोखी नजर आया कभी शाम तो कभी सहर नजर आया तुम बिन यूं तो हम जागे हैं…

  • मेरी कलम से | डॉ. बी.एल. सैनी

    सप्ताह के सात रंग सोमवार का सूरज संग नया उत्साह लाए,आलस्य मिटे, कर्म का दीप जगमगाए।जीवन की डगर पर पहला कदम बढ़े,सपनों का कारवां उम्मीद से जुड़े। मंगलवार ऊर्जा का संचार करे,परिश्रम की ज्योति हर ओर भर दे।कठिन राहें भी सरल बन जाएं,साहस से हर मंज़िल कदमों में आएं। बुधवार का दिन सिखाए सादगी,ज्ञान की…

  • स्त्री मन सदा कुंवारा

    स्त्री मन सदा कुंवारा कोमल निर्मल सरस भाव, अंतर अनंत मंगल धार । त्याग समर्पण प्रतिमूर्ति, धैर्य संघर्ष जीवन सार । सृजन अठखेलियों संग, अनामिक अविरल धारा । स्त्री मन सदा कुंवारा ।। अप्रतिम श्रृंगार सृष्टि पटल, स्नेहगार दया उद्गम स्थल । पूजनीय कमनीय शील युत, नैतिक अवलंब दृष्टि सजल । आत्मसात नित्य यथार्थ बिंदु,…

  • मां की वेदना

    मां की वेदना   मां कोख में अपने खून से सींचती रही।   अब तुम बूंद पानी  देने को राजी नहीं।   मां थी भूखी मगर भरपेट खिलाती रही।   अब तुम इक रोटी देने को राजी नहीं।    मां थी जागती रात भर  गोद में सुलाती रही।    अब तुम इक बिस्तर  देने को…

  • किसानों की राहें | Kisano ki Rahen

    किसानों की राहें! ( Kisano ki Rahen )   आँसू से लथपथ किसानों की राहें, कोई उनसे कह दे वो घर लौट जाएँ। सियासी अखाड़े उन्हें छोड़ दें अब, मुसीबत पहाड़ों की या तोड़ दें अब। लागत किसानों की तो वो दिलाएँ, कोई उनसे कह दे वो घर लौट जाएँ। आँसू से लथपथ किसानों की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *