पापा की परी से प्रेम कहानी

( Papa ki pari se prem kahani )

 

सुना था परियां आसमान में रहती है,
तो फिर क्यों एक लड़की मुझे हर रोज चाहती है,
सुना था कहते उसके बारे में कि वो अपने पापा की परी है,
तो फिर क्यों वो जमीं पर रहती है,
सुना था अपने भाई की वो लाडली है,
तो फिर क्यों वो मेरा गुस्सा सहती है,
सुना था हर बात पर वो घर में जिद्द करती है,
तो फिर क्यों मुझसे कभी कुछ नहीं कहती है,
सुना था वो खुले आसमान में उड़ना चाहती है,
तो फिर क्यों बदलते लोगों के बीच भी वो बस मेरा इंतज़ार करती है,
सुना था वो हर बात पर रोती है,
तो फिर क्यों मेरे सामने वो हर रोज खिलखिलाती है,
सुना था वो बहुत सी चीजों से डरती है,
तो फिर क्यों मेरे लिए वो शेरनी बन जाती है,
सुना था वो अपने घर की जान है,
तो फिर क्यों कहती वो मुझसे उसके चेहरे की मुस्कान है,
सुना था उसके लिए उसके पापा उसका संसार है,,
तो फिर क्यों देखती वो मुझमें अपने पापा सा प्यार है,
ये परी सबसे जुदा है जो बस मेरे लिए बनी है,
अपने पापा के बाद जो मेरी पसंद बनी है,
ये पापा की परी मेरे जीवन की सबसे प्यारी निशानी है,
शायद यहीं वजह है जो इतनी पाक हमारी प्रेम कहानी है।

रचनाकार : योगेश किराड़ू
बीकानेर ( राजस्थान )

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