अटल के इरादे

अटल के इरादे

टलना मैंने सीखा नहीं,
जिगर शेर-सा मैं रखता हूं।
कायर नहीं जो पीठ दिखाऊं,
अटल इरादे मैं रखता हूं।।

प्रहरी हूं मैं भारतवर्ष का,
तन हिमालय-सा मैं रखता हूं।
तूफानों से ना कोई डर मुझे,
अटल इरादे मैं रखता हूं।।

सत्य,अहिंसा,शांति का,
मूलमंत्र स्वीकार मैं करता हूं।
मानवता की राह चलने का,
अटल इरादे मैं रखता हूं।।

शत्रु की सांसे मैं रोक दूं,
खम ठोक हुंकार मैं भरता हूं।
साहस मेरे लक्ष्य का गहना।
अटल इरादे मैं रखता हूं।।

देश-रक्षा की खातिर,
सर्वस्व अर्पण मैं करता हूं।
करने को जीवन न्यौछावर,
अटल इरादे मैं रखता हूं।।

गर्व है मुझे देश पर,
माटी चंदन-सा मैं रगड़ता हूं।
भारत को विश्वगुरु बनाने का,
अटल इरादे मैं रखता हूं।।

टलना मैंने सीखा नहीं,
जिगर शेर-सा मैं रखता हूं।
कायर नहीं जो पीठ दिखाऊं,
अटल इरादे मैं रखता हूं।।

साहित्यकार : पी.यादव ‘ओज’
झारसुगुड़ा।ओडिशा।

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