बाप को उसने | Baap ko Usne

बाप को उसने

( Baap ko Usne )

बाप को उसने ख़ुदाई दी है
हाथ बच्चे ने कमाई दी है

तेरा अंदाज़ निराला यह भी
दर्द देकर भी दवाई दी है

उम्र भर जिससे वफ़ाएं कीं थीं
मुझको उसने भी बुराई दी है

खिल गयीं कलियां दिले- मुज़्तर की
तेरी आहट जो सुनाई दी है

पूछता कोई तो मैं कह देता
बेसबब ही ये सफ़ाई दी है

ऐ अज़ल चाहे जहाँ ले चल अब
ज़ीस्त ने हमको रिहाई दी है

ये जुनूँ की ही अता है मीना
मेरी वहशत ने फनाई दी है

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • आसां नहीं होता | Ghazal Aasan Nahi Hota

    आसां नहीं होता ( Aasan Nahi Hota )   बज़ाहिर लग रहा आसां मगर आसां नहीं होता बहुत दुश्वार उल्फ़त का सफ़र आसां नहीं होता। ज़मीं एहसास की बंजर अगर इक बार हो जाये लगाना फिर मुहब्बत का शजर आसां नहीं होता। सुनो अहदे वफ़ा करना अलामत इश्क़ की लेकिन निभाना अहद यारों उम्र भर…

  • रत-जगे | Rat-Jage

    रत-जगे ( Rat-Jage ) ख़ल्वत में रत-जगे,कभी जलवत में रत-जगे।बरसों किए हैं हमने मुह़ब्बत में रत-जगे। करते हैं जो ख़ुदा की इ़बादत में रत-जगे।आएंगे काम उनके क़यामत में रत-जगे। समझेगा कैसे हाय वो लुत्फ़-ए-ग़म-ए-ह़यात।जिसने किए हैं सिर्फ़ मुसर्रत में रत-जगे। क़ुरबत में चैन देते हैं यह बात सच है,पर।तकलीफ़ दिल को देते हैं फ़ुरक़त में…

  • कुछ नज़ीरों से

    कुछ नज़ीरों से ये बात आज भी साबित है कुछ नज़ीरों सेगये हैं शाह सुकूँ माँगने फ़क़ीरों से क़दम बढ़ाने से मंज़िल करीब आती हैउलझ रहा है तू क्यों हाथ की लकीरों से बहुत दिनों से है बरबाद ज़िन्दगी अपनीलड़ाई कितनी लड़ें अपने हम ज़मीरों से किया है सामना कुछ यूँ भी तंग दस्ती कालिबास…

  • बिजलियां | Bijliyan

    बिजलियां ( Bijliyan ) किस क़दर रक़्स़ां हैं हाय बहरो-बर में बिजलियां।ख़ौफ़ बरपा कर रही हैं दिल-जिगर में बिजलियां। जिनकी हैबत से लरज़ता है बदन कोहसार का।बन्द हैं ऐसी तो मेरे ख़स के घर में बिजलियां। या ख़ुदा मेह़फ़ूज़ रखना , आशियाने को मिरे।वो गिराते फिर रहे हैं शहर भर में बिजलियां। क्या डरेंगे हम…

  • ज़माने के चलन | Zamane ke Chalan

    ज़माने के चलन ( Zamane ke Chalan ) ज़माने के चलन ही सीख यह हमको सिखाते हैंकिसी को याद रखते हैं किसी को भूल जाते हैं छलकते हैं किसी की आँख से हर वक़्त पैमानेमुहब्बत से हमें हर बार वो जी भर पिलाते हैं न जाने कौन सा वो गुल खिलाने पर हैं आमादाअदाओं से…

  • गुज़र जाते हैं | Guzar Jaate Hain

    गुज़र जाते हैं ( Guzar jaate hain )   पल रहे क़ल्ब में मलाल गुज़र जाते हैं आते जब नव्य,विगत साल गुज़र जातें हैं ॥ रंज शिकवे शिकायतें भी कही दम भर के जश्न के साथ बहरहाल गुज़र जातें हैं ॥ शादमानी थी रही या कि रही ये नुसरत ताज़े वादों के संग हाल गुज़र…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *