रत-जगे

रत-जगे | Rat-Jage

रत-जगे

( Rat-Jage )

ख़ल्वत में रत-जगे,कभी जलवत में रत-जगे।
बरसों किए हैं हमने मुह़ब्बत में रत-जगे।

करते हैं जो ख़ुदा की इ़बादत में रत-जगे।
आएंगे काम उनके क़यामत में रत-जगे।

समझेगा कैसे हाय वो लुत्फ़-ए-ग़म-ए-ह़यात।
जिसने किए हैं सिर्फ़ मुसर्रत में रत-जगे।

क़ुरबत में चैन देते हैं यह बात सच है,पर।
तकलीफ़ दिल को देते हैं फ़ुरक़त में रत-जगे।

उनकी इ़बादतों सी इ़बादत नहीं कोई।
करते हैं जो किसी की अ़लालत में रत-जगे।

आती थी उनकी याद तो सोते न थे कभी।
हमने किए हैं ऐसे भी ग़ुरबत मे रत-जगे।

बर्बाद उसने कर ली यक़ीनन ही ज़िंदगी।
जिसने किए किसी की कबाह़त में रत-जगे।

क़र्ज़े फ़राज़ कैसे चुकाओगे उनके तुम।
करते हैं जो वतन की ह़िफ़ाज़त में रत-जगे।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • मेरी धरती माँ | Meri Dharti Maan

    मेरी धरती माँ ( Meri dharti maan )   मेरी धरती माँ प्यारी है भारत की ख़ुशबू फ़ैली है ऐसा न कहीं देश मिलेगा गंगा जमना जो मिलती है उगते है गुल उगती सरसों धरती माँ देखो ऐसी है सैनिक करे है हिफाज़त कर सकता न अदू ज़ख्मी है नफ़रत के दुश्मन ख़त्म हुई उल्फ़त…

  • प्यार हम बार बार करते हैं

    प्यार हम बार बार करते हैं यूँ ख़िज़ां को बहार करते हैंप्यार हम बार बार करते हैं मिलना होता है जब किसी से हमेंअक्ल को होशियार करते हैं कैसे जाऊं न बज़्म में उनकीरोज़ वो इंतज़ार करते हैं जो भी आता है ख़ुद निशाने परहम उसी का शिकार करते हैं प्यार मैं सिर्फ़ उनसे करता…

  • दिल को राहत है इस बहाने से

    दिल को राहत है इस बहाने से तेरी ग़ज़लों को गुनगुनाने सेदिल को राहत है इस बहाने से दिल में कितने ही उठ गये तूफांइक ज़रा उनके मुस्कुराने से लुत्फ़ आने लगा है अब मुझकोनाज़ नखरे तेरे उठाने से प्यार के सिक्के हैं बहुत मुझ पररोज़ लूटा करो खज़ाने से ढह गया है महल उमीदों…

  • मेरे साथ साथ | Mere Sath Sath

    मेरे साथ साथ ( Mere Sath Sath ) पहाड़ बन के मेरे साथ साथ चलता रहा वो एक टुकड़ा था बादल को जो बदलता रहा लिपट गई तो कलेजे को पड़ गई ठंडक और इतनी ठंड की फिर रोम रोम जलता रहा जो लोग पहले ग़लत कर चुके दुआ उनको उन्हीं को देख के हर…

  • बहकी-बहकी सी | Ghazal Behki Behki Si

    बहकी-बहकी सी ( Behki Behki Si ) बहकी-बहकी सी वो रहती तो है कब से, मन ही मन में कुछ वो कहती तो है कब से ! चल रहा है क्या ना जाने दिल में उसके, बन शिला सी सब वो सहती तो है कब से ! राज कुछ तो है छुपा दिल में दबाये,…

  • मैं ग़रीब हूँ | Main Gareeb hoon

    मैं ग़रीब हूँ ( Main gareeb hoon )   पैसे से बहुत मैं ग़रीब हूँ जहाँ में ऐसा बदनसीब हूँ मुक़द्दर न ऐसा मिला मुझे ख़ुशी के न ही मैं क़रीब हूँ कोई साथ दे सदा जो मेरा बहुत ढूंढ़ता वो हबीब हूँ बुरा लोग क्यों चाहते है फ़िर किसी का न जब मैं रक़ीब…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *