Baat Badi

खीचो बात बड़ी होती है | Baat Badi

खीचो बात बड़ी होती है

( Kheecho baat badi hoti hai )

बहरे मीर
वज़्न=== २२ २२ २२ २२ २२ २२ २२ २

 

खींचो बात बड़ी होती है, छोडो तो ज़द टलती हैं I
देख रवानी जीवन में बस दो बातो से चलती है II

गिरती दीवारों का क़ायल शायद ही कोई होगा I
उगते सूरज की ख़िदमत को दुनिया रोज मचलती है II

अल्लाह राम रहीम मसीहा गुरुनानक हो या ईशा I
एक नसीहत सबकी, दिल में प्यार मुहब्बत पलती है II

सागर में ही आख़िर जाता है सारी नदियों का जल I
भक्ति,दुआ जाती उस तक ही जिस भी राह निकलती है II

जाना तो होगा अम्बर गर मंजिल चाँद सितारें हैं I
दोष लकीरो को देने से कब तक़दीर बदलती है II

खुद पे नाज़ करो तुम मिलती हो जब नफ़रत बेमतलब I
सबक़त ले जाने वालो से ही तो दुनिया जलती है II

उठना गिरना और संभालना ये अंदाज़ -ए-मुज़फ्फर हैं I
चींटी भी चढ़ती जो ऊपर सौ सौ बार फिसलती हैII

उसकी चाहत ना-चाहत उसकी मर्ज़ी उसका मसअला i
ख़ुद की सोच सदाकत रखो सीधी होती बलती है II

क्या होगा ख़तरा-ए-दुश्मन,चौकस तुम,’याशी वो दूर I
नागिन-ए-आस्तीन ज़हर कानो में रोज उग़लती है II

सुमन सिंह ‘याशी’

वास्को डा गामा,  ( गोवा )

शब्द

सबक़त ले जाना = दूसरे से आगे बढ़ जाना, श्रेष्ठता प्राप्त करना, प्रमुखता प्राप्त करना
अंदाज-ए-मुजफ्फर=
विजेताओं की अदा , गुण ‘
बलती=
churned, twisted, टर्न्ड
सदाकत=
सच्ची , सही
ज़द=चोट, मार,/हानि/ नुकसान

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