Ram Vanvas

राम वनवास | Ram Vanvas

राम वनवास

( Ram Vanvas )

 

राम वनवास नेपथ्य में,उर्मिला उत्सर्गी श्रृंगार

दांपत्य जीवन अभिलाष,
हर पल हर कदम संग संग ।
आरोह अवरोह भाव पथ,
आत्मसात परस्पर रंग कंग ।
मिलन उत्कंठा दिव्य ज्योत,
उर उत्संग नेह सलिल धार ।
राम वनवास नेपथ्य में,उर्मिला उत्सर्गी श्रृंगार ।।

जनक नंदनी नित वंदन,
परिणय राम अनुज लक्ष्मण ।
जानकी वैभव भगिनी प्रभा,
भाग्य आरेख विरोह लक्षण ।
चौदह वर्ष अज्ञातवास काल,
पति उपासना अनन्य साकार ।
राम वनवास नेपथ्य में,उर्मिला उत्सर्गी श्रृंगार ।।

लक्ष्मण वशीभूत भ्रात प्रेम,
सिय सुशोभना प्रणय बंधन ।
उर्मिला उर्मि जप तप साधक,
परिवार सेवा अनूप स्पंदन ।
आलिंगन मधुर प्रियल निद्रा,
लक्ष्मण प्रदत्त चेतन उपहार ।
राम वनवास नेपथ्य में,उर्मिला उत्सर्गी श्रृंगार ।।

निशि दिन मंगल कामना,
निर्बाध पूर्ण दृढ़ प्रतिज्ञा ।
अविरल अप्रत्यक्ष योगदान ,
सुवासित कर उत्थानिक प्रज्ञा ।
ख्याति पट अनामिक संज्ञा,
त्याग पराकाष्ठा नित जय जयकार ।
राम वनवास नेपथ्य में, उर्मिला उत्सर्गी श्रृंगार ।।

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

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