बचपन वाली ड्रेस | Bachpan wali Dress

बचपन वाली ड्रेस

( Bachpan wali dress ) 

 

मेरे बचपन की वो नीली ड्रेस मेरे सबसे खास है,
आज भी सहेजे हुए वो अलमारी में मम्मी के पास है।

उससे जुड़ी कई बचपन की यादें हैं,
बहुत ही हसीन वो झूले पर उससे जुड़ी बातें है।

देखता हूं आज भी मां को जब उसे संभालते,
ऐसा लगता है मानो,मुझे ही बचपन के जैसे छू रही हो, हाथों से अपने सहलाते।

जब भी पूछता हूं इस नीली ड्रेस को संभाले रखने की वजह,
मां कहती है,चुप कर,अलमारी में ही नहीं,
इसकी तो है मेरे दिल में भी जगह।

सुनकर उनका ये जवाब बड़ा सुकून मिलता है,
मेरी हर बात का जवाब आज भी बस मां के पास मिलता है।

यूं तो बहुत सी चीज आज भी संभाली पड़ी है,
पर ना जाने क्यों,इस नीली ड्रेस से कुछ खास बात जुड़ी है।

ये ड्रेस मेरे दिल के बेहद करीब है,
इससे जुड़ा किस्सा भले अजीब है।

मेरी मां को जो सबसे खास,
उनके दिल के पास है,
वही मेरे लिए पसंदीदा चीज मेरी सबसे खास है।।

 

रचनाकार : योगेश किराड़ू
बीकानेर ( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

मन और तन | Man aur tan

Similar Posts

  • दिकुप्रेम की राह

    दिकुप्रेम की राह जीवन मेरा बस तुझसे जुड़ा एक अफसाना है,हर लम्हा तेरा इंतज़ार, प्रेम बस तेरा दीवाना है।कभी हँसी में तू आई, कभी अश्कों में बसी,अब हर साँस में बस तेरी यादों का तराना है। राहों में तेरा एहसास अब भी मौजूद है,तेरी बातों की मिठास हर लम्हा मख़मल सी दूज है।कभी ख्वाबों में…

  • भारत माँ के लाल उठो | Patriotic poem Hindi

    भारत माँ के लाल उठो ( Bharat maa ke laal utho )     केसरिया बाना ले निकलो राम नाम हुंकार भरो हर हर महादेव स्वर गूंजे ऐसी तुम जयकार करो   धीरे वीर पराक्रमी सब विवेकानंद कहते जागो भारत मां के लाल उठो आगे बढ़ आलस त्यागो   स्वाभिमान राणा की भूमि तलवारों का…

  • स्वतंत्रता

    स्वतंत्रता   नभ धरातल रसातल में ढूंढ़ता। कहां हो मेरी प्रिये  स्वतंत्रता।। सृष्टि से पहले भी सृष्टि रही होगी, तभी तो ये बात सारी कहीं होगी, क्रम के आगे नया क्रम फिर आता है, दास्तां की डोर बांध जाता है।। सालती अन्तस अनिर्वचनीयता।।                        …

  • गुमान | Kavita Gumnam

    गुमान ( Gumnam ) पहुँच जाओगे एवरेस्ट की उचाई तक नाप लोगे पाताल की गहराई भी पर, गिरने या डूबने पर बचाने वाले लोग भी हों ख्याल इस बात का भी रखना होगा हर मौसम अनुकूल नहीं होता हर कोई प्रतिकूल नही होता बनाकर चलते हैं जो उन्हे कुछ भी मुश्किल नहीं होता लहरों की…

  • अर्थ जगत | Kavita Arth Jagat

    अर्थ जगत ( Arth Jagat )   अर्थ जगत अनुपमा, प्रेरणा पुंज मारवाड़ी समाज ************ उद्गम राजस्थानी मरुथल धरा, न्यून वृष्टि संसाधन विहीन । तज मातृभूमि आजीविका ध्येय अंतर्मन श्रम निष्ठ भाव कुलीन । प्रायः राष्ट्र हर क्षेत्र श्री गमन , लघु आरंभ बुलंद आर्थिक आवाज । अर्थ जगत अनुपमा, प्रेरणा पुंज मारवाड़ी समाज ।।…

  • फूल और कांटे | Phool aur kaante | Kavita

    फूल और कांटे ( Phool aur kaante )   सदा रहो मुस्काते राही नित पथ में बढ़ते जाना बाधाओं का काम रोकना निरंतर चलते जाना   फूल और कांटे जीवन में सुख दुख आते जाते संघर्षों में पलने वाले सौरभ भरकर मुस्काते   पुष्प की सुंदरता को हम दूर से निहारा करते कांटो से सुरक्षा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *