विश्वास | Vishwas

विश्वास

( Vishwas ) 

 

माना ,मैं कुछ नही
नंदी भर हूं उनके सागर की
तब भी गर्व है मुझे
की उनकी इकाई तो हूं !

विश्वास है मुझे
कर्म ही मंजिल है मेरी
पहुचूं न पहुंचूं मुकाम तक
परिणाम तो है वक्त के गर्भ मे
तब भी ,गर्व है मुझे
की मेरा वजूद तो है !

ख्वाहिश नही महासागर की
सागर भी शायद न बन पाऊं
सरोवर भी कम तो नही
तब भी गर्व है मुझे
की जल तो बनकर रहूंगा ही !

समझौता करूं स्वाभिमान से
यह गंवारा नही मुझे
विनम्रता मे नम्रता भी
सीमित है एक सीमा तक ही
टूटा हूं खुद मे भी कई बार
तब भी गर्व है मुझे
की अभी तक बिखरा नही हूं !

 

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

लागत | Laagat

Similar Posts

  • श्री देवनारायण भगवान | Shri Devnarayan Bhagwan par Kavita

    श्री देवनारायण भगवान ( Shri Devnarayan Bhagwan ) आज लोक देवता मानता है आपकों पूरा राजस्थान, भगवान विष्णु के अवतार थें कहलाएं देवनारायण। जो माघ मास मे शुक्ल पक्ष की षष्ठी को ये जन्में थें, जीवन सारा लगा दिया था जिन्होंने लोक कल्याण।। जिनकी माता का नाम साढ़ू और पिता सवाई भोज, १८००० पशुधन था…

  • जल संरक्षण | Poem jal sanrakshan

    जल संरक्षण ( Jal sanrakshan )   सोचल्यो समझल्यो थोड़ा हिवड़ा म ध्यारल्यो पाणी घणों मान राखै मन म बिचारल्यो   मोतिड़ा सा दमकै ज्याणी पाणी री आब ज्यूं सांसा री डोर संभळै पाणीड़ा री धार सूं   सूखरया तळाब कुआं लूंवा चालै बारनै पाणीड़ो बचाणो भाया जमाना र कारणै   ठण्डों ठण्डो पाणी मिलज्या…

  • सिक्का | Sikka

    सिक्का ( Sikka  )   सिक्का उछालकर देखो कभी सिक्का थमाकर देखो समझ आ जायेगी जिंदगी कभी खुद को भी संभालकर तो देखो…. ये रौनक ,ये चांदनी ढल जायेगी उम्र की तरह दिन भी बदल जायेगा रात मे ही ढलती शाम की तरह…. पसीना बहाकर तो देखो गंध स्वेद की चखकर तो देखो कभी रोटी…

  • अभी और सधना होगा | Poem abhi aur sadhna hoga

    अभी और सधना होगा ( Abhi aur sadhna hoga )   नहीं  साधना  पूरी  हुई है, अभी और  सधना होगा। अभी कहाँ कुंदन बन पाये, अभी और तपना होगा।।   अभी निशा का पहर शेष है, शेष अभी दिनकर आना अभी भाग्य में छिपा हुआ है, खिलना या मुरझा जाना अभी  और  कंटक  आना  है,…

  • इतिहास बदल कर रख दूंगा

    इतिहास बदल कर रख दूंगा माना अभी नहीं उछला है,सिक्का मेरी किस्मत का,पर जिस दिन ये उछलेगा, इतिहास बदल कर रख दूंगा. पत्थर पर पत्थर लगते हैं,सपने टूटा करते हैं.खुद से रोज बिखर जाते हैं,खुद हीं जुटा करते हैं. बादल, बिजली, तूफानों को,झेल – झेल कर बड़े हुए.काल कर्म की चक्की में,अक्सर हम कूटा करते…

  • किसान | Kisan kavita

    किसान ( kisan par kavita )   खुशनसीब होते हैं वो, जो खेतों में रहा करते हैं। भूमिपुत्र  किसान,  कृषि  कार्य किया करते हैं। अन्नदाता  देश  का, जिसमे  स्वाभिमान भरा। भेज  देता  लाल सीमा पर, रक्षा हेतु मातृधरा।   तपती धूप सहता रहता, तूफानों से टकराता है। बहा  पसीना  खेतों  में, वो ढेरों अन्न उगाता…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *