Badli ka Swag

बदली का स्वैग | Badli ka Swag

बदली का स्वैग

( Badli ka swag ) 

 

हवा के परों पर
उड़ती हुई सी आई
एक बदली-
छोड़ सारे राग-रोग
जम -ठहर गई
रमा के जोग।
आंँखों में है आकाश
कर में बूँदों का पाश
छलकेगी- बरसेगी
देगी आज जीवन
औ धरा को सांँस-
इस उन्मत्त बदली को
शायद है पता-
उसके यूँ झरते
मृदुल हास
के सिवा धरा पर
धरा है और क्या !!

 

@अनुपमा अनुश्री

( साहित्यकार, कवयित्री, रेडियो-टीवी एंकर, समाजसेवी )

भोपाल, मध्य प्रदेश

 aarambhanushree576@gmail.com

यह भी पढ़ें :-

बाल सखा हम | Baal Sakha

Similar Posts

  • नौशाबा की कविताएँ | Naushaba Poetry

    अफ़सोस ज़िंदगी की राहों में,हर कोई तकलीफ़ों से गुज़रता है,तपता है गम की धूप मे कभीकभी देखता है स्वप्न खुशियों केमगर अफ़सोस !डसते हैं रात के अंधेरे बहुतभोर का उजाला भी ठहरता कहाँ है! सालते ही रहते हैंटूटे ख्वाबों के एहसासहर लम्हा बीती घड़ी का हिस्सा होता हैदूर दूर तक रहती हैं विरानियाँहर पल गुजरा…

  • गौरी नन्दन | Gauri Nandan

    गौरी नन्दन ( Gauri Nandan ) प्रभात वेला~ गणेश जी की होती प्रथम पूजा • गौरी नन्दन~ रिद्धि सिद्धि के दाता करूँ वन्दन • संकट हर्ता~ मूषक की सवारी सुख प्रदाता • गणाधिराज~ मिटा दो दुनिया से कोरोना राज • जगनायक~ जगत में हो शांति हे! विनायक • निर्मल जैन ‘नीर’ ऋषभदेव/राजस्थान यह भी पढ़ें…

  • अब कलम लिखे किसकी जयगान

    अब कलम लिखे किसकी जयगान जब हुआ सबेरा खून खराबा इसी में रहता है जग सारा, वेद मंत्र सब धरे धरा पर नहीं करे कोई गुणगान | अब कलम लिखे ———–! रक्षक, भक्षक बनकर जीता अरमानों के अश्क़ को पीता, माली रौंदे अपनी बगिया गा गाकर पूरबी तान | अब कलम लिखे———! एक चमन है…

  • जिंदगी को महकाना | Tyohar Par Kavita

    जिंदगी को महकाना ( Zindagi ko mehkana )   त्योहारों के दिन आते ही गरीब की मुश्किलें बढ़ती जाती है अच्छे कपड़े,अच्छे भोजन नाना प्रकार के सामग्रियों की जरूरत गरीब की कमर तोड़ देती है अभावग्रस्त जीवन चूल्हे की बुझी राख भूख और बेचारगी से बिलखते बच्चे हताशा और निराशा के अंधेरे में तड़फता बिलबिलाता…

  • टी.आर.पी. के चक्कर में

    टी.आर.पी. के चक्कर में ****** आजकल चैनलों पर न्यूज की जगह डिबेट आ रह रहे हैं, बहुत लोग अब टी.वी देखने से घबरा रहे हैं। जनता के सरोकार वाली खबरों की जगह- नफरत और हिंसा बढ़ाने वाले टॉपिक डिबेट में छा रहे हैं, टी.वी वाले एंकर एक तरह से जनता को उकसा रहे हैं। चीख-चीख…

  • खुद्दारी पे आँच आने न पाए | Khuddari par kavita

    खुद्दारी पे आँच आने न पाए! ( Khuddari pe aanch aane na paye )   दीमाग पर अंधेरा जमने न पाए, यादों का मेला ओझल होने न पाए। ख्वाहिशों का कोई अंत नहीं भाई, माता-पिता की हबेली बिकने न पाए। एक जहां है इस जहां के और आगे, उस जहां का धन राख होने न…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *