बाल मजदूरी

बाल मजदूरी | Bal majdoori par kavita

बाल मजदूरी

( Bal majdoori )

 

 

खुद असमर्थ बनकर

बच्चों से कराते मजदूरी।

अगर कोई उठाये सवाल

कहते यह हमारी मजबूरी।

 

बच्चे न माने तो

 दिखाए चाकू छुरी।

उनके उज्जवल भविष्य से खिलवाड़ कर

कराते उनसे बाल मजदूरी।

 

जिन हाथों में कलम होनी चाहिए

हे ! प्रभु कैसी है लाचारी?

क्यो बच्चों के जीवन में

छा रही मजदूरी की महामारी?

 

कलंक बन जाते खुद पर

जो कराते बाल मजदूरी।

कितनों को अपाहिज बनाकर

हाथों में पकडा देते कटोरी।

 

 

❣️

लेखक दिनेश कुमावत

 

यह भी पढ़ें :-

कड़वी बातें | Poem kadvi baatein

 

 

Similar Posts

  • कोई पत्थर की मूरत है | Patthar ki Murat

    कोई पत्थर की मूरत है ( Koi patthar ki murat hai )    कोई पत्थर की मूरत है किसी पत्थर में मूरत है। कैसा शहर है दिलों का ये पत्थर खूबसूरत है। कोई पत्थर दिल होता है कोई पत्थर को पूजे है। कोई पथरीले नयनों से देखके अपनों को पूछे हैं। कोई पत्थर को सजाते…

  • मित्र | Kavita Dosti par

    मित्र ( Mitra )   लम्हे सुहाने हो ना हो। चाहत की बातें हो ना हो। प्यार हमेशा दिल में रहेगा, चाहे मुलाकात हो ना हो।   खुशियों में गम़ मे भी शामिल रहेगे। तुझसे अलग हो के कैसे रहेगे। बातें सभी दिल की तुमसे कहेगे। चाहे दिन खुशनुमा ये रहे ना रहे।   लम्हे…

  • हम मजबूर हैं | Mazdooron ki vyatha par kavita

     हम मजबूर हैं   ( Hum majboor hai )     साहब! हम मजदूर हैं इसीलिए तो मजबूर हैं सिर पर बोझा रख कर खाली पेट,पानी पीकर हजारों मील घर से दूर गोद में बच्चों को लेकर अनजान राहों पर चलने को।   बेबस हैं हम,लाचार हैं हम आए थे काम की तलाश में पर,इस #Lockdown में न…

  • मैं गीत नहीं गाता हूॅ | Main Geet Nahi Gata Hoon

    मैं गीत नहीं गाता हूॅ ( Main geet nahi gata hun )   शब्दों का खेल रचाकर, मन अपना बहलाता हूॅ। मैं गीत नहीं गाता हूॅ। कवि कर्म नहीं कुछ मानूॅ, रचनाधर्मिता न जानूॅ, भावों की धारा में बह सुख से समय बिताता हूॅ। मैं गीत नहीं गाता हूॅ। मन दूर जगत से जाता, आनन्द…

  • .हैसियत | Haisiyat

    .हैसियत ( Haisiyat )    शौक नही महफिलों को सजाने का मुझे घर की दीवारें भी खड़ी रहें यही बहुत है मेरे लिए देखी होगी तुमने ऊंचाई से जमीन हमने तो जमीन से ऊंचाई को देखा है… चम्मच से हम नही खाते अंगुलियों मे ही हैं पंच तत्व की शक्तियां हांथ ही उठा सकते हैं…

  • परशुराम जयंती | Kavita Parshuram Jayanti

    परशुराम जयंती ( Parshuram Jayanti ) शस्त्र शास्त्र चिन्मयता संग,उग्र आवेश अपार नयनन छवि अद्भुत, पावक संग श्रृंगार । मात पिता रेणुका जमदग्नि, श्री हरी षष्ठ अवतार । कर शोभा शस्त्र शास्त्र, सत्य सत्व व्यक्तित्व सार । शस्त्र शास्त्र चिन्मयता संग, उग्र आवेश अपार ।। त्रिलोक अविजित उपमा, आह्वान स्तुति सद्य फलन । असाधारण ब्राह्मण…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *