मजबूत नींव का भरोसा चाहिए

मजबूत नींव का भरोसा चाहिए || Majboot neev ka bharosa || Kavita

मजबूत नींव का भरोसा चाहिए

( Majboot neev ka bharosa chahiye  )

कमजोर नींव पर बना मकान टिकता नहीं है
माल रद्दी हो तो मुफ्त में भी बिकता नहीं है।
टिकने या बिकने के लिए भरोसेमंद होना जरुरी है-
तभी उसके प्रति लोग आकर्षित होते हैं,
कभी कभी तो मुंहमांगी कीमत देते हैं।
बनिए भरोसेमंद
बनिए हुनरमंद
आपके चाहने वाले ढ़ूंढ़ ही लेंगे
कीमत के प्रति आंखें मूंद ही लेंगे।
यही बिकता है
यही टिकता है
आपका विश्वास ही उनको चाहिए,
बस यह विश्वास बना रहना चाहिए।
यही रिश्ता टिकाऊ होता है,
वरना इस आर्थिक युग में तो हर चीज बिकाऊ है,
पर किंचित न टिकाऊ है।
बिकाऊ से बचिए,
विश्वास बनाए रखिए।
खरीदने से पहले परखिए,
मकान से पहले नींव देखिए।
खाने से पहले चखिए,
रिश्ता करने से पहले गरीब रिश्तेदारों से मिलिए।
वही सच बयां करेंगे,
सारी हकीकत सामने ला खड़ा करेंगे।
दादा/नाना के घर जाइए,
उनसे महत्वपूर्ण जानकारी पाइए।
तब जाकर कीजिए कोई रिश्ता,
यही लोग हैं फरिश्ता ।
वरना आगे पछताना पड़ेगा,
घुट घुटकर रिश्ता निभाना पड़ेगा;
दिन-रात भय में बिताना पड़ेगा।
भरोसेमंद ना लगे तो छोड़ दें,
बढ़े कदम पीछे खींच लें
इसी में समझदारी है
होशियारी है,
वरना समस्या आने वाली भारी है।
सदैव सचेत रहेंगे,
तो परेशानी में कम पड़ेंगे।
यही जीवन दर्शन है,
बाकी सब माया मोह का आकर्षण है।

 

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें : 

अच्छे दिन वाले शहर की हकीकत | Kavita

Similar Posts

  • मौन अभिव्यक्ति | Kavita Maun Abhivyakti

    मौन अभिव्यक्ति ( Maun Abhivyakti ) जब सूर्य क्षितिज के नीचे होता है, और– आकाश में जब चमक होती है, उस शांति को सँजोये हुए, ये छायाएँ चाँदनी की कोमल, चमक में मिल जाती है, वही भावनाओं की एक ध्वनि, उड़ान भरती है, तब— मैं रात में अपने दिल की, फुसफुसाहट सुनती हूँ। मेरे अन्तःकरण…

  • बंधित | Bandhit

    बंधित ( Bandhit )    कल वो फिर नही आई मेरी काम वाली बाई और मैं सोचती रही क्या हुआ होगा पेट दर्द, सिर दर्द, हाथ दर्द या पैर में पीड़ा.. रोज सुबह चाय का कप साथ पीने के बहाने जब बैठा देती हुँ उसे काम के बीच रोककर देखती सुनती हुँ उसे तब उठती…

  • सत्य राम कहॉं से लाऊँ?

    सत्य राम कहॉं से लाऊँ? दशानन रावण का अहम् हुंकार ,विजय से पराजय जाता है हार,पर यह तो त्रेतायुग की कहानी,कलयुग रावणों का ही है संसार । दुष्कर्म,विवाद,द्वेष,दम्भ,दिखावट,ढूँढती कहाँ हैं राम, कहाँ है केवट?छल-कलह,दगेबाज,कपटी-व्यापार,अन्याय,अत्याचार,अनादर, बनावट। प्रत्येक साल विजयादशमी है आती,नई ऊर्जा जन-जनार्दन में है भरती,नौ दिन आदिशक्ति देवी नवरात्र पर्व,रामलीला प्रदर्शन हर्षोल्लासित करती। प्रशंसा से…

  • चाहे काँटे मिले या कि फूल

    चाहे काँटे मिले या कि फूल   चाहे काँटे मिले या कि फूल मुस्कुरा के तू कर ले क़ुबूल   झूट को सच कहा ही नहीं अपने तो कुछ हैं ऐसे उसूल   हाल ऐसा हुआ हिज्र में जर्द आँखें है चेहरा मलूल   आस फूलों की है किसलिए बोये हैं आपने जब बबूल  …

  • विश्व पर्यावरण दिवस रोज मनाएं

    विश्व पर्यावरण दिवस रोज मनाएं   विश्व पर्यावरण दिवस रोज मनाएं आओ चलो एक पेड़ लगाएं। सबकी रक्षा धर्म हमारा चलो पीपल ,बरगद ,नीम लगाएं। एक पेड़ लगाएं। सावन भादो ढूंढ के लाएं गौरैया, गिलहरियां आंगन बुलाएं। एक पेड़ लगाएं। पेड़ हमारा जीवन है इसकी रक्षा करना है धरती उजड़े इससे पहले हरियाली को पुनः…

  • Kavita Kagaz ki Kashti | कागज की कश्ती

    कागज की कश्ती ( Kagaz ki kashti )   कागज की कश्ती होती नन्हे  हाथों  में  पतवार कौन दिशा में जाना हमको जाने वो करतार आस्था विश्वास मन में जाना  है  उस  पार बालपन का भोलापन क्या जाने संसार   भाव भरी उमंगे बहती नन्हे  बाल  हृदय  में चंचल मन हिलोरे लेता बालक के तन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *