बालिका दिवस 24 जनवरी | Balika Divas

बालिका दिवस

( Balika Divas ) 

 

बेटियां अब आतुर हैं, आगे कदम बढ़ाने को

पुनीत कर तन मन,
निहार रहीं धरा गगन ।
सौम्य सी मुस्कान लिए,
निज ही निज सह मगन ।
दृढ़ संकल्पित होने लगीं,
मंजिल अपनी पाने को ।
बेटियां अब आतुर हैं, आगे कदम बढ़ाने को ।।

खोज रही है नई राह,
दिव्य मृगनयनी दृष्टि से ।
साहस उनका जाग उठा ,
आत्मविश्वासी वृष्टि से ।
बहा रहीं खूब पसीना ,
विजयी गीत सुनाने को ।
बेटियां अब आतुर हैं,आगे कदम बढ़ाने को ।।

अंतर्मन अथाह उमड़ रहा,
जोश उत्साह उमंग ।
शिक्षा दीप्ति ओज संग,
बदल रहीं जीवन ढंग ।
ऊर्जस्वित हुई चूड़ी खनक,
असंभव शब्द मिटाने को ।
बेटियां अब आतुर हैं, आगे कदम बढ़ाने को ।।

स्नेह प्रेम अनंत सरिता
अंतरतम मधुर विमल धार ।
संबंध अपनत्व सुपर्याय,
व्यवहारिकी मधुरिमा अपार ।
कामयाबियां पास आ रहीं,
अब उन्हें गले लगाने को ।
बेटियां अब आतुर हैं,आगे कदम बढ़ाने को ।।

बोर्ड हो या आई ए एस परीक्षा ,
नित सुशोभित उत्तम स्थान ।
खेलकूद व अन्य क्षेत्र पर,
भर रहीं हौसली उड़ान ।
अथक जप तप साधना,
समानता परचम लहराने को ।
बेटियां अब आतुर हैं, आगे कदम बढ़ाने को ।।

 

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

यह भी पढ़ें:-

पराक्रम दिवस | Parakram diwas

Similar Posts

  • स्मृतियाँ | Kavita Smritiyan

    स्मृतियाँ ( Smritiyan ) स्मृतियों के घने बादल फिर से घिरकर आयें हैं सांध्य आकाश में सांध्य बेला में तारे छिप रहें हैं कभी तों कभी झिलमिला रहें हैं स्मृतियों के घने बादल फिर से घिर रहें हैं घनघोर होगीं फिर वर्षा आसार नजर आ रहें हैं पग चिन्ह हैं तुम्हारे जानें के जो लौटकर…

  • भारत की बेटी ” हिंदी ” हमारी

    भारत की बेटी ” हिंदी ” हमारी साहित्य की फुलवारी lलगती सबसे न्यारी llडंका बजा कोने – कोने में lएक ही आवाज गूँजी हर मन में llप्रतिष्ठा की है , अधिकारी lहिंदुस्तान की है , बोली प्यारी llबोलो कश्मीर से कन्याकुमारी lबने राष्ट्रभाषा हिंदी हमारी ll संस्कृत से जन्मी हिंदी हमारी lसंस्कार से अलंकृत हिंदी…

  • सविता जी की कविताएँ | Savita Hindi Poetry

    पुरानी तस्वीर कुछ तस्वीरें पुरानी सी है। बीते दिनों की आखिरी निशानी सी है। पुराने होकर भी कुछ किस्से पुराने नहीं लगते। अंजान होकर भी कुछ लोग अनजाने नहीं लगते। यूं तो अक्सर हम आगे बढ़ जाते हैं वक्त के साथ । फिर भी कुछ लम्हे वहीं ठहर जाते हैं अपनों के पास। कभी-कभी लगता…

  • मन के मीत | Man ke meet kavita

    मन के मीत ( Man ke meet )     मेरे मन के मीत मेरे मन की थी कल्पना कोई भोली भाली अल्पना आती है मुझे बार बार सपना बाहों में भरकर उसको अपना बना लेते हो   मेरे मन के मीत मुझे तुम बहुत याद आते हो सपनों में क्यूँ सताया करते हो रोज…

  • सड़क सुरक्षा | Sadak suraksha par kavita

    सड़क सुरक्षा ( Sadak suraksha )   1. वाहन चलाते थूकना, है खतरे का काम। हो सकता है हादसा, जा सकती है जान। 2. बेल्ट बांध गाड़ी चला, तेज चाल मत चाल। दुर्घटना भी घट जावे, बचे अंग अरु भाल। 3. दक्षता से वाहन चले, सीख सार संभाल। यात्रा जब हो दूर की, ईंधन हवा…

  • सकल सृष्टि के गुरु | Sakal Srishti ke Guru

    सकल सृष्टि के गुरु ( Sakal Srishti ke Guru ) हे महादेव, महेश, महेश्वर! सृष्टि के एक मात्र हैं गुरुवर। नमन ,नमन ,कोटि-कोटि है नमन।। आप से ही ज्ञान सब पाकर। गुरु का पद निभाते हैं जाकर। सत् का प्रकाश देते आप भर। हे महादेव, महेश ,महेश्वर ! सकल सृष्टि को तारने वाले। भोलेनाथ हैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *