भाग कर प्रेम और विवाह

भाग कर प्रेम और विवाह

( Bhag kar prem aur vivah )

 

पत्नि ने मुझसे चिरोरी करते हुए कहा “चलो हम भाग कर शादी कर ले। ” हरेक पत्नि की तरह मेरी पत्नी भी एक ऐसा बिजली का तार है जो दूर से भी झटके मारती है।

इस बार चिरोरी कर रही थी। लगता है किसी जोर का झटका देने की तैयारी में वह बिजली का तार था। मैं ने कुछ दूर सरक कर कहा “पागल हो गई हो क्या” हम बाकायदा पति पत्नी है।

अब हम भाग कर जायेगे तो हमे कोई नही ढूॅढेगा। पड़ोसी अलबत्ता हमारे एक बी.एच.के (एक बेडरूम हाल, और किचन) वाले बंगले पर कब्जा कर लेंगे।”

उसने कहा “भाग कर शादी करते का अलग आनन्द है। एक रोमांच है। अभी तो तुम ऐसे शादी कर लाये जैसे बकरा खरीदा जाता है।

पहले तुम्हारे मां बाप ने मेरे मां बाप की हैसियत देखी। उन्हे नमस्ते करने के बावजूद यह देखने के लिये मैं गूंगी तो नही, उन्होने भजन गाने को कहा ।

यह देखने के लिए कि मैं लंगड़ी तो नही तुम्हारे उस लफंगे बहनोई ने मुझे नाचने के लिए कहा । तुम जो ऐसे सिर झुकाये रहे जैसे तुम बकरा हो और मैं खरीदरार (पहले ऐसे ही शादी तै होती थी)

मैनें समझाते हुए कहा “भाग कर शादी करने में हमारी दोनो औलादें गैर कानूनी हो जायेंगी। तुम जानती ही हो कि शादी के पहले वाली औलादो को क्या कहते है।

“मैं जानती हॅू कि उन्हे नाजायज औलादें कहते है।” उसने जवाब दिया“ पर हम उन्हे प्रेम विवाह करने के बाद गोद ले लेंगें” जैसे पिटने वाला भागते भागते गाली देता है ऐसे ही मैने दफ्तर जाते जाते कहा “भूल जाओं और शाम को भटे का भुर्ता खाने को मन कर रहा है।

पत्नी एक व्यवस्था होती है उसे मालूम रहता है कि पति एक जहाज के पक्षी की तरह रहता है। उसे लौट कर वापस आना ही रहता है।

और पत्नी का कहना यानि कि कानून मानना ही पड़ता है। शाम को मैं वापिस आया तो उसने भुर्ते की सब्ती परसते हुण्े कहा “मेरे सुबह भागने कर शादी करने वाले प्रस्ताव का क्या हुआ ?”

मैंने कहा जो पड़ोस के अधेड परन्तु कुवारे शर्मा जी है।” वे सुबह से ही तुम्हें तांक झांक (डरते डरते घूरने का तरीका) करते रहते है। तुम्हे देखने के लिये, श्रीवास्तव जी घर पर है ? कह कर घर में घुसने का प्रयत्न करते है ।

मैं उनके साथ तुम्हारे भागने का इन्तजाम कर देता हॅैू। मेरे तो घुटने का दर्द करने लगे है अतः नही भाग पाऊंगा ।”

उसने तुनक कर जवाब दिया” तुम्हे शर्म नही आमी किसी अच्छे आदमी की बर्बादी के बारे में सोचते हुये।” तो क्या अपनी बर्बादी के बारे में सोचूॅ मैने दबी आवाज से कहा “उसके बारे में सोचने के लिये तुम्हे जरूरत नही है वह बोली मैं समझ गया कि यह सब समाचार पत्रों की उन खबरो का असर है ।

जिनमें लिखा रहता है कि फलां सेठ की लड़की फलां लफंगे के साथ भाग गई फिर लड़की लिख कर पूछती है कि (कोर्ट मैरिज” करने के बाद) वह कब आर्शीवाद लेने आ जावे । वह यह भी लिखती है कि भागने में बन्टी (अब उसका पति) को कोई कसूर नही है।

मैने पति को सलाह दी “तुम ऐसा करो कि बच्चे के साथ मायके चली जाओं फिर जो कुछ गहना रूपया तुम्हारे मां बाप के पास है उन्हे समेट कर पार्क में चली आना । मै तुम्हें वहीं इन्तजार करता मिलंॅूगा। वहां से हम दोनो भाग चलेंगें।

भाग कर हम लोग किसी होटल में थ्रिल का अनन्द उठायेगे और हमारे बच्चों की देख रेख तुम्हारे मां बाप करते रहेंगे । कुछ दिन बाद तुम्हारे मां बाप पुलिस मे रिपोर्ट लिखवा देंगे कि उनके बिटिया दामाद बगैर चोरी किये घर से भाग गये है।

उसने परले सिरे से ही यह समझदारी भरा सुझाव नकार दिया और बोली मेरे जमींदार बाप (उनके मकान से लगी एक सात सौ वर्ग फीट की जमीन भी थी) दहेज देकर पहले की  ही भिखारी (मुझ से उधार मांगते मांगतें दहेज से ज्यादा वसूल चुके है) हो चुके है।

एसा  करते है कि मेरे मां बाप को हम पहले यहां बुला लेते है। फिर अपना ही माल चुरा कर हम यहां से भाग चलेगें। बाद की घटनाऐं तुम्हारे सुझाव के अनुसार ही घटेंगी। इसज तरह आधी बात मेरी और आधी तुम्हारी मान ली जायेगी।

मैं समझ गया कि शादी के बाद भी लड़की उसके मां बाप की ही रहती है, पति की नही हो पाती। आजकल हर विद्यार्थी को (स्कूल) कालेज में आकर प्रेम करने की बहुत जल्दी रहती है। मालूम नही फिर प्रेम कर पाये या नही ? ऐसा न हो कि बगैर प्रेम किये ही जिन्दगी हाथ से फिसल जाये। कालेज और यूनीवर्सिटी तो शहर से भागी नही जा रही ।

डिग्री तो (वगैर पड़े)  बाद में भी मिल जायेगी । वे पहले मिल कर सारी योजना बनो लेते है कि कहां से अर्थ व्यवस्था करेगे फिर भाग कर कौन से हिल स्टेशन पर जायेंगे। सर्कस के जोकरो की तरह किस तरह के रंग बिरंगे कपड़े पहनेंगे। किस पेड़ के चारो तरफ घूम घूम कर गाने गायेंगे। और कैसे  वापिस आने के बहाने बनायेंगे।

जिस जगह प्रेम किया जाता है वहां विवाह नही किया जाता। प्रेम विवाह भाग कर ही किये जाते है। प्रेम करने की जगह सदि विवाह किया जावे तो पिटने का डर रहता है। कई बार तो पिटने के डर के कारण ही प्रेम नहीं किया जाता।

कुछ विद्यार्थी केवल प्रेम करने तक ही कालेज में पड़ते है। प्रेम होते ही वे कालेज छोड़ देते है सेठ लक्ष्मी चन्द जी को एक लड़के की चाहत में छः लडकीयां पैदा हो गई। जो लडका पैदा हुआ वह भी लक्ष्मी वाहन जैसा । एक बार उनकी चैथी लड़की ने कहा “पापा पापा मैं पडोसी लड़के राजू के साथ भागना चाहती हॅॅू”

सेठ लक्ष्मीचन्द उस योग्य लड़की पर प्रसन्न हो गये। खुशी दबाते हुये बोले “बेटी आजकल आधुनिक युग है । आजकल लड़की को लड़का पसन्द करने का पूरा अधिकार है। बताओं हमारी बिटिया उस योग्य लड़के के साथ कब भागना चाह रही है” चैथी लक्ष्मी बोली “पापा राजू ही तैयार नही हो रहा”

सेठ जी बोले “उसे मेरे पास लाओं मैं उसे तुम्हारे साथ भागने के लिये तैयार कर लंॅूगा।” लड़की ने कहा “वह पूछता है है कि तुम्हे भगाने के लिये तुम्हारे पिताजी कितनपे लाख रूपये देंगें। पड़ोस के बेबी के पिताजी तो उसे भगाने के लिए पांच लाख रूपये तक देने के लिए तैयार है।

कुछ पड़े लिखे लड़के उससे भी ज्यादा समझदार होते है पैसों के इन्तजाम के लिये वे शादी किसी और लड़की से करते है और जो कुछ एन्गेजमेन्ट में मिलता है उसे लेकर अपनी प्रेमिका के साथ साथ भाग जाते है। कई कालेजो के व्यावयाता अमीर लोगो की लड़कियों से नैन मटक्का करते है और गुरू से पति वन जाते हैं।

लव्वो लुआव यह कि प्रेम विवाह के लिये चोरी से प्रेम करना पड़ता है। ये प्रेमी रक्षा    बन्धन पर गायब हो जाते है और वेलेन्टाइन डे पर प्रकट हो जाते है। फिर पैसो के लिये चोरी करते है। चोरी से शादी करते है और शादी करने के बाद सीना तान कर प्रकट हो जाते है इसी को कहते है चोरी और सीना जोरी।

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लेखक : : डॉ.कौशल किशोर श्रीवास्तव

171 नोनिया करबल, छिन्दवाड़ा (म.प्र.)

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