प्रधानी

Bhojpuri Vyang | प्रधानी

प्रधानी

( Pradhani )

 

 1

गउंआ भा लंका बजा जब डंका

 फोन गईल घर से राजधानी

आवा हो भैया कन्हैया भी आवा

 भौजी  लड़े अबकी प्रधानी …..

 आवा हो भैया….

2

आपन सीट जुगाड़ भी फीट

करें मनमानी जो देवई पीट

 चले नहीं मर्जी नहीं वोट फर्जी

  होय ना देबई अबकी बेईमानी …..

 आवा हो भैया…

3

 दारू मुर्गा और बाटब साड़ी

  बाटी खियाउब पियाउब ताड़ी

  नोट से वोट खरीद के

खूब लड़े अबकी मर्दानी …..

 आवा हो भैया…

4

छपा तब पर्चा बढ़ा तब खर्चा

 होई लगी तब गाँव में चर्चा

 वोटर सपोर्टर सब घूमे फिरे

जयकारा लगावे जय हो भवानी…..

  आवा हो भैया….

5

 मिला निशान किसान  ओसावे

घर घर भौजी और भैया चिन्हावे

साथ में हाथ धरे तब घूमे

 देखी राखी भैया के पानी…

 आवा हो भैया….

  6

वोट पड़ी खूब नोट लड़ी

 मतदाता के मन में खोट बड़ी

 मतदाता का हाल विधाता न जाने

जीत रही अब कौन  निशानी …

आवा हो भैया….

7

    शुरू मतगणना गणना बा जारी

दस वोट से भौजी गई तब हारी

 देखि के हाल वेहाल बा भौजी

        “रूप” के आखों में आये भी पानी…..

आवा हो भैया…..

?

कवि : रुपेश कुमार यादव ” रूप ”
औराई, भदोही
( उत्तर प्रदेश।)

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