Bhram

भ्रम | Bhram

भ्रम

( Bhram )

 

जो गति तेरी वो गति मेरी,जीवन भ्रम की छाया है।
नश्वर जग ये मिट जाएगा, नश्वर ही यह काया है।

धन दौलत का मोह ना करना, कर्म ही देखा जाएगा,
हरि वन्दन कर राम रमो मन,बाकी सब तो माया है।

यौवन पा कर इतराता हैं, बालक मन से भोला है।
रूग्ण हुआ तन यौवन खोकर,जीवन को जब तोला है।

क्या खोया क्या क्या पाया है, इसका कोई मोल नही,
कर्म लेखनी लिखी हुई है, वो ही तो बस मेरा है।

कर ले तू निर्माण भवन का, वो भी जर्जर होता है।
एक समय ऐसा भी आता, जब वो बिखरा होता है।

माया मे डूबा मन मेरा, लोभ मोह मे जकडा है।
नाम भी मिट जाता है इक दिन,वक्त का ऐेसा फेरा है।

देने वाला जब हरि है तो, फिर कैसा मद् है तुममे।
वो ही सबकुछ देख रहा,छुपता है तू क्यो किससे।

मत कर अब अभिमान शेर,जग इक दिन झूट ही जाएगा।
जो गति तेरी वो गति मेरी, इसको ही देखा जाएगा ।

 

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें : –

माँ की याद में | Maa ki Yaad me

Similar Posts

  • बटवारा

    बटवारा   बूढ़े बरगद के चबूतरे पर घनेरी छांव में। देखो फिर एक आज बंटवारा हुआ है गांव में।। कुछ नये सरपंच तो कुछ पुराने आये, कुछ बुझाने तो कुछ आग लगाने आये। बहुत चालाक था बूढ़ा कभी न हाथ लगा, पुराने दुश्मनों के जैसे आज भाग्य जगा। पानी कब तक उलचें रिसती नाव में।।…

  • 222 वां आचार्य श्री भिक्षु चरमोत्सव दिवस

    222 वां आचार्य श्री भिक्षु चरमोत्सव दिवस प्रातः स्मरणीय क्रांतिकारी वीर भिक्षु स्वामी को आज उनके 222वें चरमोत्सव दिवस पर भाव भरा वंदन । महामना आचार्य श्री भिक्षु को शत – शत श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए चरमोत्सव दिवस पर मेरे भाव……..…. करे तन्मय बनकर भिक्षु स्वामी का स्मरण । इससे बढ़कर और कोई दूसरा नहीं…

  • विरह वेदना | Virah Vedna

    विरह वेदना ( Virah Vedna )    सोहत सुघर शरीर नीर अखियन से बहे आतुर अधर अधीर पीर विरहन के कहे। चित में है चित चोर शोर मन में है भारी सालत शकल शरीर तीर काम जब मारी । शीतल सुखद समीर शरीर तपन जस जारे दाहत प्रेम की पीर हीर बिन कौन उबारे। मन…

  • बोझ स्वाभिमान का | Bojh Swabhiman ka

    बोझ स्वाभिमान का ( Bojh swabhiman ka )   भर लिए भंडार ज्ञान का सर पर लादे बोझ स्वाभिमान का दब गई बेचारी विनम्रता संशय हर बात पर अपमान का बढ़ गई अकड़ दंभ से मिलने का मन बहुत कम से आंकने लगे कीमत और की बढ़ी औकात खुद की सबसे अदब, लिहाज सब छोटे…

  • सिर्फ | Sirf

    सिर्फ ( Sirf )    मिला सिर्फ दर्द ,और मिले सिर्फ आंसू आपसे लगाकर दिल,कहो हमे क्या मिला मिल गई है मंजिल ,आपकी तो आपकी आपकी यादों के सिवा,कहो हमे क्या मिला कह दिए होते,नही मंजूर यह सिलसिला रेत की तृष्णा के सिवा,कहो हमे क्या मिला सिवा प्यार के कब तुम्हारा,साथ हमने मांगा खामोशी के…

  • Hindi Diwas Poem | मेरा सम्मान – मातृभाषा हिन्दी

    मेरा सम्मान – मातृभाषा हिन्दी ( Mera samman – matribhasha Hindi )   कब तक हिंदी मंद रहेगी अग्रेजी से तंग रहेगी कब तक पूजोगे अतिथि को कब तक माँ यूँ त्रस्त रहेगी माना अग्रेजी की जरूरत सबको माना बिन इसके नहीं सुगम डगर हो माना मान सम्मान भी दिलवाती पर मातृ भाषा बिन कैसी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *