आपने क्या किया मुहब्बत में

आपने क्या किया मुहब्बत में

आपने क्या किया मुहब्बत में

फ़र्क़ क्या इश्क़ और मशक्कत में
आपने क्या किया मुहब्बत में

हमने पिंजरा बना के तोड़ दिया
मशगला आ गया है आफ़त में

और लोगों को भी सराहो तुम
नइं तो फिर बैठ जाओ ख़लवत में

वो कोई शै गुज़र बसर की नहीं
फिर भी शामिल किया ज़रूरत में

ख़ुद की सोची तो ताज ख़ोरों ने
झोंक डाला दयार ग़ारत में

जान जाती है सोचने में फ़क़त
कोई मरता नहीं हक़ीक़त में

दाम सिगरिट का कुछ नहीं है ‘असद’
मौत है ज़िंदगी की क़ीमत में

असद अकबराबादी 

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