मधुरिम अहसास

बिन तेरे कृष्ण है आधा | Bin Tere Krishna hai Aadha

बिन तेरे कृष्ण है आधा

( Bin Tere Krishna hai Aadha )

कौन सा तप की हो राधा?
या कोई जादू की हो!
कोई शक्ति हो ?
अथवा भक्ति की हो?
आसक्ति की चरम सीमा तक आसक्त ,
तीनों लोक के स्वामी विष्णु,
तुम्हारे भक्त आसक्त हैं।
स्नेह सुधा बरसाने वाली राधा,
बिन तेरे कृष्ण हैं आधा।,
तेरे गले का घाव,
हरि चरण पर उभर जाए,
तेरे ऑसू कृष्ण को ,
बेहद पीड़ा पहुंचाए ,
रासलीला की आविष्कत्रीं,
छन्द ताल मदनारी हो,
बावरा हुआ छलिया हरि,
तेरे पीछे-पीछे भागे है,
कृष्ण को जो साधे वो राधे,
जिसके प्रेम की विरह में जले,
ऐसी अहोभाग्यशाली है राधे,
मिलन नहीं यादगार इश्क मिला,
ताउम्र का प्रेमिल सौभाग्य मिला,
उद्धार हो जाए जो बोले राधे-राधे,
राधे के बिना गिरधर हैं आधे,
कुछ दया हम पर भी बरसा दो,
हम है प्रेम के भूखे अभागे ,
मेरी नईया पार लगा दो|

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

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