Shivaji Maharaj par Kavita

छत्रपति वीर शिवाजी | Shivaji Maharaj par Kavita

छत्रपति वीर शिवाजी

( Chhatrapati Veer Shivaji ) 

 

पूरी ज़िन्दगी करता रहा वह संघर्ष वीर मराठा,
नाम था जिसका छत्रपति शिवाजी महाराजा।
महान उनको बनानें में समर्थ रामदास के हाथ,
दुःख दर्द अपनी प्रजा का ये राजा ही समझा।।

दादा कोणदेव के संरक्षण में ली विद्या अपार,
माॅं जिजाऊ मार्गदर्शन से मिला धर्म-संस्कार।
महाराणा प्रताप जैसे बनें ये अग्रगणी शूरवीर,
राष्ट्रप्रेमी कर्त्तव्यनिष्ठ कर्मठ योद्धा था ये वीर।।

१९ फरवरी १६३० में मराठा परिवार में जन्में,
पिता शाहजी एवं माता जीजाबाई के गर्भ से।
अमर स्वतंत्रता सेनानी बनके आपने दिखाया,
जुड़े हुऐ है अनेंक किस्से आपकी ज़िन्दगी से।।

बहुत लोग आपको हिन्दुओं का सम्राट कहते,
तो कई लोग आपको मराठों का गौरव कहते।
बचपन के खेल से ही किले को जीतना सीखें,
माते भवानी तुलजा की आप उपासना करते।।

आप अच्छे सेनानायक एवं कूटनितिज्ञ भी थे,
स्त्रियों के प्रति हिंसा उत्पीड़न विरोध किऐ थे।
नौसेना अहमियत समझकर नौसेना बनाएं थे,
स्वयं प्रकट होकर देवी मैय्या तलवार दिऐ थे।।

राष्ट्रीयता के जीवंत परिचायक ये शिवाजी थे,
पत्नी विरांगना व आप हिंदुस्तानी शासक थे।
सारासच लिखा है हमनें इस कविता के अंदर,
गुरु के ‌लिए शिवा शेरनी का दूध भी लाऐ थे।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • ख्वाबों में जलाएगी | Kavita Khwabon mein Jalayegi

    ख्वाबों में जलाएगी! ( Khwabon mein Jalayegi )    ये जिस्म नहीं है बस आग बुझाने के लिए, अंतिम है इसका लक्ष्य मोक्ष पाने के लिए। अपनों से जंग बताओ कोई क्या लड़ेगा, अगर करो भी सौदा तो हार जाने के लिए। होता है गम बाढ़ के पानी के जैसा दोस्तों, बस साँसें टिकाए रखो…

  • बनारस | Kavita Banaras

    बनारस ( Banaras )   कण कण में हैं शंकर जिसके , और मिट्टी है पारस ! तीन लोक से न्यारी नगरी , जिसका नाम बनारस !! आबोहवा यहां का अनुपम, फिजा में बसती मस्ती ! मोक्ष धाम है महादेव का , मानवता की बस्ती !! स्नेह समन्वय सदाचार संग, बहती ज्ञान की गंगा! सुख…

  • Kavita Raat Kaali | रात काली रही

    रात काली रही ( Raat Kaali Rahi )   रात  काली  रही  दिन  उजाला  भरा, बीतीं बातों पे चिन्तन से क्या फायदा।   वक्त कैसा भी था, दुख से या सुख भरा, बीतें लम्हों पे चिन्तन से क्या फायदा।   जब उलझ जाओगे, बीतीं बातों में तुम, आज की मस्तियाँ ग़म मे ढल जाएगी।  …

  • भूले से चेहरे | Geet bhoole se chehre

    भूले से चेहरे  ( Bhoole se chehre )     भूले  से  चेहरे  कितने  ही, आँखों में घिर आए हैं ! अपना भी चेहरा है उनमें, या हम फिर भरमाए हैं !!   प्रातः कीआशा बन आये, हैं जग में कब से उजियारे लेकिन अबभी अन्धियारों से,भरे हुए घरके गलियारे मैं अपने आँगन में बैठा…

  • कमल खिलाना ही होगा | Kamal

    कमल खिलाना ही होगा ( Kamal khilna hi hoga )    सकल जगत कल्याण हेतु तुमकों आगे आना होगा। हिन्दू हो हिन्दू के मन में, रिद्धंम जगाना ही होगा। भारत गौरव का इतिहास, पुनः दोहराना ही होगा। भय त्याग के हिन्दू बनकर, तुम्हे सामने आना होगा। दबी हुई गरिमा गौरव से, गर्त हटाना ही होगा।…

  • हरा रंग | Hara Rang par Kavita

    हरा रंग ( Hara rang )    हरा रंग हरियाली का सद्भाव प्रेम खुशहाली का उत्साह पत्ता डाली का सुरभीत चमन माली का धरा मुस्कुराने लगी फिर ओढ़कर धानी चुनरिया कुदरत लहराने लगी ज्यों झूमी ब्रज में गुजरिया हरी भरी ये वसुंधरा हमारी लगती सबको प्यारी है रंग बिरंगे फूलों की महकती केसर की सी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *