बुढ़ापा की लाठी

बुढ़ापा की लाठी | Laghu Katha

नीमा को ससुराल आये तीन माह ही हुए थे ।वह रट लगा दी कि मैं अलग खाऊंगी। आज से चूल्हा अलग…! मैं आपके मां-बाप को भोजन नहीं दे सकती। राहुल के लाख समझाने के बावजूद भी नीमा पत्थर की लकीर बनी रही।

राहुल के मां-बाप भी हारकर अपनी बहू नीमा को कह दिये तुम्हें जो चाहिए वह ले लो और तुम सुख से जियो! हमारे तरफ से तुम्हें पूरी छूट है।

नीमा अलग भोजन बनाती और राहुल का इंतजार करती, राहुल आयेगा तब एक साथ बैठकर भोजन करेंगे। ऐसे- ऐसे एक माह हो गया पर वह न ही नीमा के हाथ से भोजन किया ना ही अपनी पत्नी के कमरे में गया। अंतत: नीमा थक हारकर अलग खाना बंद कर दिया और अपने सास- ससुर से माफी मांगी।

संदेश -जागो! बेटे- बहुओं मां-बाप, सास- ससुर के अरमान में पानी मत फेरो।आज बेटा- बहू हैं, वही कल सास- ससुर होंगे तो क्या चाहेंगे? यही न, बुढ़ापा की लाठी।

कहानीकार: दिनेंद्र दास
कबीर आश्रम करहीभदर
अध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद् तहसील इकाई बालोद
जिला- बालोद (छत्तीसगढ़)

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • असमंजस | Kahani Asamanjas

    सुधांशु बहुत उधेड़बुन में है। उसे समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें? क्या ना करें ? सोचते हुए आज धीरे-धीरे एक मां हो गए। जब वह मां की 13वीं से लौट रहा था तो उसके पिताजी बहुत मायूस लग रहें थे। वह दूर जाते हुए अपने बेटे बहु को अपलक देखते रहे।…

  • नालायक | Laghu Katha Nalayak

    “अंकल, हम आपकी बेटी जैसी नहीं लगती जो आप इस घर में इतना तनाव बनाए हुए हैं? पापा मेरे, आपकी बेटी की शादी के लिए प्रतिबद्ध थे कि भाई की बेटी हमारी बेटी होती है। हम किसी भी हाल में अलग नही होंगे। जब आपकी बेटी की शादी हो गई तो आप अलग होने के…

  • अच्छे मूल्यों की शिक्षा

    एक छोटे से गाँव में एक छोटा लड़का रहता था, जिसका नाम रोहन था। रोहन के माता-पिता उसे बहुत प्यार करते थे और उसे अच्छे मूल्यों की शिक्षा देना चाहते थे। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि किस तरह रोहन को अच्छा लड़का बनाया जाए, उसमें अच्छे संस्कार डाले जाएं। अचानक रोहन के…

  • सवाल:- गलती किसकी ?

    नेहा बैंक में क्लर्क के पद पर कार्यरत थी। ससुराल से ही वह बैंक आना-जाना करती थी। नेहा का पति राहुल एक प्राइवेट कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत था। दोनों की शादी को 3 वर्ष बीत चुके थे लेकिन उनके कोई बच्चा नहीं था। नेहा को प्राइवेसी पसंद थी। उसे पाबंदी लगाने…

  • सच्चा प्यार – अ ट्रू लव स्टोरी

    प्रभात और संध्या दोनों एक दूसरे से बेहद प्यार करते थे। नाम तो उनके विपरीत थे। पर दोनों को देखकर यूं लगता था मानो “मेड फॉर ईच अदर” है। कहने को तो उनकी अरेंज मैरिज थी, लेकिन उनके बीच में लव मैरिज से ज्यादा प्रेम था। प्रभात एक छोटा-सा व्यापारी था और संध्या स्कूल में…

  • वो लड़की | Laghu Katha Wo Ladki

    मां बाप की पांच संतानों में से एक,सबसे ज्यादा सुंदर,गोरा बदन, काले घने लम्बे बाल, सुंदरता की मिसाल, कोमलांगी कन्या। जहां खड़ी हो जाए, देखने वालों की निगाहें वहीं टिक जाएं। वो सरल है,सहज है, भोली है, कोई फर्क नही पड़ता, लोग क्या करते हैं, पर उसे अपनी मंजिल तक पहुंचना है। परिश्रम में कोई…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *