कविताएँ

  • ओ निष्ठुर मनुष्य!

    ओ निष्ठुर मनुष्य! ओ निष्ठुर मनुष्य! क्यों तू,हरे-भरे वृक्षों को काटकर,उनको टुकड़ों में बाँटता है।सुनो! ये वृक्ष भी तो रोते हैं,इनको भी तो पीड़ा होती है। ओ निष्ठुर मनुष्य ! क्यों तू,हो गया इतना पत्थर-दिल?इन वृक्षों से ही जहाँ में तू,मानव तू ! जीवित रहता है।सोचा भी है तूने ओ मनुष्य,इन समस्त वृक्षों के बारे…

  • बचपन का गाँव | Bachpan ka Gaon

    बचपन का गाँव ठण्डी-ठण्डी छांव मेंउस बचपन के गाँव मेंमैं-जाना चाहती हूँ।तोडऩा चाहती हूँबंदिश चारों पहर की।नफरत भरी येजिन्दगी शहर की॥अपनेपन की छायामैं पाना चाहती हूँ।उस बचपन के गाँव मेंमैं-जाना चाहती हँ हूँ॥घुट-सी गयी हूँइस अकेलेपन मेंखुशियों के पल ढूँढ रहीनिर्दयी से सूनेपन मेंइस उजड़े गुलशन कोमैं महकाना चाहती हूँ।उस बचपन के गाँव मेंमैं-जाना चाहती…

  • शीत का प्रथम स्पर्श

    शीत का प्रथम स्पर्श जब शीतल पवन ने कानों को छुआ,आँगन में अलसाई धूप ने अंगड़ाई ली।पत्तों पर ओस की मोती-सी बूंदें,धरती ने मानो सर्द चादर ओढ़ ली। सूरज भी अब मद्धम मुस्कुराने लगा,दोपहर का आलस लंबे साए में छुपा।हाथों में गर्म चाय की प्याली सजी,संवेदनाओं का अंश हर कण में बसा। पगडंडियों पर कोहरे…

  • तुम रहो खुश | Tum Raho Khush

    तुम रहो खुश चलो हमने हार मान लिया,अब तो तुम खुश हो।चलो हमने शीश झुका दिया,अब तो तुम खुश हो।मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता इन सब बातों से कभी,मेरी वजह से दुखी न रहो, अब तो तुम खुश हो।। हमने सुना था कि जो झुकना जानता वो टूटता नहीं,हमने सुना था जो दूसरों को खुश…

  • सत्य के साथ रहो

    सत्य के साथ रहो सत्य के साथ रहो!!!जो हो भी बात कहो!!!वक़्त एक जैसानही होताहै सभी काना कभीकिसी को आघात करो!!!!दिन को दिन औररात को रात कहो!!!हलकी बारिश की बूंदो कोना गहरी बरसात कहो….धैर्य रखना आगे बढ़नासबके साथ रहो… अनिल कुमार सिंह “अनल “राही रायबरेलवी मुन्ना ठाकुर यह भी पढ़ें :-

  • प्रेम के दो बोल | Prem ke Do Bol

    प्रेम के दो बोल दो बोल मोहब्बत के बोल प्यारेजिंदगी में न ज़हर घोल प्यारेतनहाइयां भरी है जमाने मेंकुछ तो मीठा बोल प्यारे।। क्या लाए हो क्या लेकर जाओगेकुछ न धन का मोल प्यारेदुनिया प्रेम की दीवानी हैप्रेम ही अनमोल प्यारे।। मोहब्बत कर लो थोड़ी जवानी मेंबुढ़ापे में अक्सर झोल प्यारेयाद करेगा कभी जमानाबस दो…

  • श्री राम सिया की विवाह पंचमी आयी

    श्री राम सिया की विवाह पंचमी आयी श्री राम सिया का विवाह महोत्सव आयाभव्य मंडप सजा विवाह उत्सव का। आज शुभ मुहूर्त अगहन मास की पंचमी कादशरथ नंदन जनक दुलारी के विवाह का। चारों दिशाओं कोने कोने से राजकुमार है आयेशिव धनुष हिला ना सका एक भी बलवान । दुख से जनक का दिल दहला…

  • गोंद के लड्डू

    गोंद के लड्डू गोंद के लड्डू, मीठे से स्वाद,सर्दी की सर्द रातों में, गर्मी का फरमाया आबाद।ताजगी से भरी, एक खजाना छुपा,इनमें तो बसी है, सेहत की हर एक ख़ुशबू। गोंद के लड्डू, नारी की सेहत के लिए वरदान,बचपन से बुढ़ापे तक, सबके लिए बनाए गए इनका अनोखा सामान।खुशबू बिखेरे इनसे, स्वाद में कुछ खास…

  • मन की पुकार | Man ki Pukar

    मन की पुकार हर धड़कन तेरे नाम से धड़कती है,तेरी यादों की लौ दिल में चमकती है।आज भी तेरी हंसी का दीवाना हूँ मैं,तुझसे बेशुमार प्यार निभाना चाहता हूँ मैं। तेरे कदमों की आहट अब भी सुनाई देती है,मेरे ख्वाबों में हर रात तू ही दिखाई देती है।तेरे बिना हर लम्हा अधूरा सा है मेरा,आज…

  • एक ही भूल | Ek hi Bhool

    एक ही भूल आज बरसों बाद तुम्हारा दीदार हुआ,दूरियाँ बनी हुई थी फिर से प्यार हुआ। लबों को तुम्हारे लबों का स्पर्श हुआ,बदन की महक का यूँ एहसास हुआ। ग़र ये ख़्वाब है तो ख़्वाब ही रहने दो,मैं सो रहा हूँ सोया हुआ ही रहने दो । चली क्यों नही जाती हो मेरी बातों से,जिस…