कविताएँ

  • एड्रिएन रिच की अनुवादित कविता | अनुवादक- दीपक वोहरा

    एड्रिएन रिच का जन्म 1929 में बाल्टीमोर, मैरीलैंड, यू.एस.ए. में हुआ था। वह लगभग बीस काव्य संग्रहों की लेखिका हैं और उन्हें एक नारीवादी और क्रांतिकारी कवयित्री कहा जाता है। पेड़ एक बिम्बों से सजी बहुत गहरी सिंबॉलिक कविता है। कवयित्री ने घर, पेड़ और जंगल तीन प्रतीक लिए हैं। घर समाज है, जहां स्त्री…

  • वाल्ट व्हिटमैन की अनुवादित कविता | अनुवादक- दीपक वोहरा

    वाल्ट व्हिटमैन (1819-1892) को अमेरिका के सबसे प्रभावशाली कवियों में से एक माना जाता है। उनका कविता संग्रह, लीव्स ऑफ़ ग्रास, अमेरिकी साहित्य के इतिहास में एक मील का पत्थर है। व्हिटमैन ट्रान्सेंडैंटलिज़्म और यथार्थवाद के बीच संक्रमण का हिस्सा थे, और उनका काम अक्सर अमेरिकी अनुभव और उसके लोकतंत्र की प्रकृति पर केंद्रित होता…

  • क्या बात हो गई

    क्या बात हो गई तुम रूठ कर चले गए क्या बात हो गई।हम बुलाते रह गए क्या बात हो गई। तुम रात ख्वाब में पैगाम ले कर आए।विन सुनाए बैठे रहे क्या बात हो गई। मुफलिसी का हल ढूंढ़ने में जिंदगी गई।हल निकला ना कोई क्या बात हो गई। मालूम होता तो बताता चौखट को।दरबाजे…

  • दलित की यथार्थ वेदनाविदा

    दलित की यथार्थ वेदनाविदा घर की खिन्नता को मिटाऊँ,या समाज की उन्नति जताऊँ lक्यूँ भूल गए है हम ,एक डाल के फूल है हम lक्लेश से व्याकुलता तक ,साहित्य से समाज तक lदलित की गति अम्बेडकर जी है ,तो दलित की यति वाल्मीकि जी है l न भूलूँ गत अनुभव ,न छोडूँ अस्त भव lसाँझा…

  • ऐ चांद | Aye Chand

    ऐ चांद ( Aye Chand ) ऐ चांद तुम जल्दी से आ जाना भूखी प्यासी दिनभर की मैं बेकरारछलनी से करूंगी साजन का मैं दीदारशर्म से लाल होंगे तब मेरे गालपिया मिलन में देर न लगा जाना।ऐ चांद तुम जल्दी से आ जाना। मेहंदी रचे हाथ, सजे कंगन के साथपूजा की थाल लिए, करवा हाथमांगूंगी…

  • करवा का चाँद

    करवा का चाँद करवा का चाँदगगन और आँगन मे तो आयातेरी और मेरी आँखो में कभी आया ही नहींछन्नी के उस पार जाती हुई धुंधली नजर में मैने तुम्हे कैद कभी किया ही नहींतुम कैद कभी हुए नहींकरवा का चाँदगगन और आँगन मे तो आयातेरी और मेरी आँखो में कभी आया नहींआँखो में कभी आया…

  • करवा चौथ का व्रत ( दिकु के लिए )

    करवा चौथ का व्रत आज मैंने अपनी दिकु के लिए व्रत किया है,उसकी यादों में हर पल को जीया है।वो दूर है, पर दिल के पास है,उसके बिना हर ख़ुशी भी उदास है,अपनी दिकु को सर्वस्व सौंप दिया है,मैंने अपनी दिकु के लिए करवा चौथ का व्रत किया है। कहते हैं, ये त्योहार केवल स्त्रियों…

  • देख ही लेती हूँ मै उसको

    देख ही लेती हूँ मै उसको दूर गगन की किस बदली में,जाने मेरा चाँद छुपा है,कौन भला उसे ढ़ूँढ़ के लायेकिसी को मेरी फिक्र कहाँ है,मै तो हूँ बस आँख उठाए किकब काली बदली छँट जाये,और मेरी सूनी आँखों मे,मुझको मेरा चाँद दिखाए,मै बर्षों से चौथ उपासी,पानी की दो बूँद को प्यासी,बस एक ही आस…

  • शिक्षक ही सच्ची प्रेरणा

    शिक्षक ही सच्ची प्रेरणा प्रणाम शब्द शेष हैं l क्यूंकि ?वे देश के विशेष हैं llशिक्षक रूप सक्षिप्त नहीं lशिक्षक रूप विस्तृत सही llतत्व से प्रकृति सजी lगुण से उपदेष्टा सजे llसमय बना पथिक रे lतो गुरु बना अद्री रे ll की विस्मरण शिष्टाचार lलगाए शासन चार llमहिमा उनकी अपरम्पार lलगा सभका जीवन पार llहकीम…

  • बोलना बेमानी हो जाए

    बोलना बेमानी हो जाए बोलो!कुछ तो बोलोबोलना बेमानी हो जाएइससे पहले लब खोलो पूछोअरे भई पूछोपूछने मे जाता ही क्या हैपूछना जवाब हो जाएइससे पहले पूछ लो चलोचाहे कितनी पीड़ा होचलना बस कदमताल न हो जाएवैसे भीचलना जीवन की निशानी हैरुकना मौत की लिखोचाहे कुछ भीकिसी के वास्तेचाहे कितना खराब हो मौसमलिखना बस नारा न…