कविताएँ

  • दलित | Dalit

    दलित ( Dalit ) वो हिंदू थे न मुसलमानवो थे मेहनतकश इंसानवो कहीं बाहर से नहीं आए थेवो मूलनिवासी थेवो आदिवासी थे वो जुलाहा थे बंजारा थेवो भंगी थे तेली थेवो धोबी थे कुर्मी थेवो कोरी थे खटीक थेवो लुहार थे सुनार थेवो चर्मकार थे महार थेवो मल्लाह थे कुम्हार थे ब्राह्मण कहते थे:वे शुद्र…

  • दो अज़नबी एक रात

    दो अज़नबी एक रात पूँछ ले ऐ मुसाफ़िर रात की तन्हाई का सहारा lकलम कह उठेगी देख आसमान में चमकता सितारा llचाँद भी ऐंठकर चिल्ला उठता है lजब मेरे संघ एकऔर चाँद दिखता है ll चाँद ने पूँछा किसओर है चित lबीते पलकी ओर है पूँछ मत llकह दो ,ढलती रात में बढ़ता अंधेरा है…

  • खेल के सूत्र बनाएँ जीवन

    खेल के सूत्र बनाएँ जीवन खेल की क्रीड़ा निराली बैर ,कभी धैर्य, परीश्रम, लगन है lतो कभी खिन्न – उदास दर है ,सहयोग , एकता भी न भूलो lतो खेल से क्या मिला ,हार – जीत या आत्मनिर्भर l स्वस्त है , मस्त है ,जिससे तन – मन चुस्त है lसिद्धांत नव दो ग्यारह नहीं…

  • भेड़ और भेड़िए Bhed Aur Bhediye

    भेड़ और भेड़िए ( Bhed Aur Bhediye ) भेड़ और भेड़िए का रिश्ताबहुत पुराना हैं आदिम काल सेभेड़ अमूमन भेड़ ही रहीभेड़िए हमेशा भेड़िएबहुत कोशिश के बाद भीउनका कत्ल-ए-आम रुका नहीं हैकुछ भेड़े मिल गई हैं भेड़ियों सेइस उम्मीद मेंकि शायद उनकी जानबख्श दी जाएगीपर वो जानती नहीं थीकि पिछली भेड़ों ने भीयही गलती दोहराई…

  • शरद चाँदनी | Sharad Chandni 

    शरद चाँदनी ( Sharad Chandni ) चली है ..पवन शीतल मंद सुगन्ध नूपुरखिले खिले हुए हैशरद की चाँदनी मेंकुन्द के फूलचंद्र पूर्ण आकार सोलह कलाओं को संग लियें उदित हुआ बदली तेजपुंज से भरी-भरीहो रही है अमृत वर्षाआकाश से आज बरस रही है शरद चाँदनीहै ओस की बूँद में भीअमृत बूटी चूर्णसब रोगों का होगा नाशमाँ…

  • बिता दशहरा | Bita Dussehra

    बिता दशहरा ( Bita Dussehra ) नव दिन नवमी बीती दशहरा बीत गयादस दिन में एक शब्द न लिख पाया। असुरों का वध कर देवों को भय मुक्त कियामहिषासुरमर्दिनी रक्तबीज का खून पिया। हे माता रानी चरण वंदन अभिनन्दनदुनिया दारी में बहुत कुछ छूट गया। वर दे वरदायिनी जगत कल्याणीछुट जाएं काम क्रोध मद लोभ।…

  • सफल जीवन उसने ही पाया!

    सफल जीवन उसने ही पाया! आया है सो एक दिन जाएगा,पर,जाने से पहले पछताएगा।कुछ काम तो कर ले बन्दे !वर्ना बच्चों के बीच शर्माएगा। बचपन, जवानी और बुढ़ापा,जीवन का हर रंग गहरा पा।अच्छा बोयेगा,अच्छा काटेगा,हरा-भरा-सा आजीवन रहेगा। बचपन में जिसे संस्कार मिला,पढ़ने का अच्छा आधार मिला।जवानी उसकी पहचान बनातीताकत भी राष्ट्र के काम आती। कुसंस्कारों…

  • तुझ से जुड़ा इंतज़ार

    तुझ से जुड़ा इंतज़ार यह कहना आसान है कि “भूल जाओ उसे,”पर जिसने सच्चा प्रेम किया, वो उसे भला कैसे भूल पाता।जिस दिल में बसी हो वो आरज़ू बनकर,उसकी यादों से इंसान कभी दूर नहीं जाता। हर रात खामोशियों में उसकी सदा गूंजती है,हर सुबह उसकी चाह में दिल मचल जाता।वो पास नहीं, फिर भी…

  • तुम बिन अधूरा प्रेम

    तुम बिन अधूरा प्रेम आंखों में भरा घना सा अंधेरा,पर तुम्हारे बिना मैं सो ना सका। दिल में बंद असह्य पीड़ाओं का समंदर,फिर भी उछलती लहरों जैसा रो ना सका। कमी रह गई शायद मेरे प्यार में कुछ,जो ईश्वर ने जुदा कर दिया हमें। टूटकर बिखर गया हमारे इश्क का हार,शिद्दत से संभाले हुए एहसासों…

  • किताब जिंदगी की | Kitaab Zindagi ki

    किताब जिंदगी की ( Kitaab Zindagi ki ) जिंदगी की किताब मे,अभी कुछ पन्ने खाली हैं ,आओ रंग दें उन्हे भी ,जो पल अभी बाकी हैं ।न जाने कब जिंदगी कीशाम हो जाए,न जाने कब शाम तो आए ,पर सुबह न आए।हर सांस पर अटकी है,दूसरी आती हुई सांस, ।न जाने कब प्रबल ,अनहोनी हो…