कविताएँ

  • नवरात्रि (दिकु के इंतज़ार में)

    नवरात्रि (दिकु के इंतज़ार में) तेरे चरणों में माँ, सारा जहाँ झुका है,तेरी ममता से जीवन, हर खुशी से भरा है।अब तेरे आशीर्वाद से, हर दुख दूर करा दे,और कुछ नहीं चाहिए माँ, मेरी बस यही बिगड़ी बना दे। नवरात्रि की हर रात, चलती है माँ तेरे नाम पर,दिकु का इंतजार है, इस दिल के…

  • नवरात्री के नौ दिवस | Navratri ke Nau Divas

    नवरात्रि के नौ दिवस ( Navratri ke nau divas ) नव दुर्गा नव रात्रे में माँ, तू नौ रूप में है दिखती।जन-जन की आस्था का बन केंद्र, सबके उर में है सजती।। नव रात्री के नौ दिवस माता, हम चरणों में माथ नवाते।रात रात भर कर जगराते, उर में भक्ति भाव उपजाते।। द्वितीय दिवस का…

  • नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) सप्तम दिवस

    नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) सप्तम दिवस नवरात्रि पर्व पर पहले अपना करो सुधार ।आत्म रमण में जाने के यह सुखद भव पार ।निज पर शासन फिर अनुशासन सुखकार ।खुद पहले सुधरे तो सुधरे यह सारा संसार ।नवरात्रि पर्व पर पहले अपना करो सुधार ।आगम में प्रभु ने बतलाया शाश्वत नित्य धर्म की छायाआत्मा के…

  • ओ इंसान | Oye Insaan

    ओ इंसान ( Oye Insaan ) ओ इंसान ,हर जगह छोड़,अपनी अच्छाई के निशान ।और अपनी, सच्चाई के निशान ।बस इसी में लगा , तू अपनी जान ।पहले बन , अच्छा इंसान ।फ़िर गुणवान, और चरित्रवान ।लोग करें , तेरा गुणगान ।कर तू कुछ , ऐसा मेरी जान ।बना अलग ,अपनी पहचान ।करें सब तुझपर,…

  • नवरात्रि | Navratri

    देवी स्कंदमाता “या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः “।। मां सिद्धिदात्री नवरात्रि का अंतिम दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना होती है। मां सभी सिद्धियों को प्रदान करती है। भगवान शिव को सिद्धियां देवी की पूजा से ही प्राप्त हुई थी। मां सिद्धिदात्री की सिद्धियों के कारण ही शिवशक्ति का रूप…

  • जिंदगी की पगडंडियों

    जिंदगी की पगडंडियों कांटों से भरी, ऊ उबड़ खाबड़ जिंदगी की पगडंडियां कहां तक साथ चलेंगी क्या जानूं। कष्टकर हैं बोझिल सी फिर भी मेरी, जिंदगी में उम्मीद की किरण लातीं , कहीं तो मंजिल मिलेगी मुझे चलते चलते अविराम डगर पर। मै हूं कि कभी कभी निराश हो जाती हूं, थक जाती हूं खुद…

  • नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) षष्ठ दिवस

    नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) षष्ठ दिवस नवरात्रि पर्व में भुवाल माता का नाम लीजिये ।ज्ञानामृत का भरकर प्याला पीजिये ।आत्मा को शुद्ध बना लीजिये ।नवरात्रि पर्व में भुवाल माता का नाम लीजिये ।बढ़ रहा वैभव ज्यों तृष्णा बढ़ रही ।अब जरा संतोष दिल में कीजिये ।नवरात्रि पर्व में भुवाल माता का नाम लीजिये ।क्यों…

  • माता हरती हर संताप

    माता हरती हर संताप देव, ऋषि और पितृ ऋण होते,जग में ऋण के तीन प्रकार।इन्हें चुकाना सनातनी का,होता जन्मसिद्ध अधिकार।पर इन तीनों से पहले है,सर्वोपरि माता का ऋण।इसे चुकाना परमावश्यक,हो सकते ना कभी उऋण।माता ने ही जन्म दिया और,मां ने हमको पाला है।इसीलिये अनगिन रूपों में,मां का रूप निराला है।बेटी, बहन, मां रूप साथ में,पत्नी…

  • जय जगदम्बे माँ | Jai Jagdamba Maa

    जय जगदम्बे माँ ( Jai Jagdamba Maa ) अम्बे माँ जगदम्बे मइया, तेरी शक्ति अपार है।मातु भवानी माँ कल्याणी, सुखी सकल संसार है।। शक्ति स्वरूपा मातु शारदे, जग का सारा ज्ञान दो।शैलपुत्री विघ्नविनाशिनी, मातु ब्रह्माणी मान दो।।दुर्गे मइया बहु शुभकारी, आभा हृदय प्रसार है।अम्बे माँ जगदम्बे मइया, माँ की शक्ति अपार है।। करें नित्य उर…

  • डॉक्टरेट महताब ए आज़ाद की कविताएं | Dr. Mahtab Poetry

    हर घर तिरंगा लहराएं जब हर घर तिरंगा है लहराएं।सब मिलकर खुशी के गीत गाएं।।अपने देश का हम मान बढ़ाएं।आओ आजादी का अमृत पर्व मनाएं।। जान से हमको तिरंगा है प्यारा।ऊंचा सदा रहे यह तिरंगा हमारा।।हिंदुस्तान की शान है यह तिरंगा।तिरंगे से लगता हिंदुस्तान न्यारा।। हर कदम पे दुश्मनों को धूल चटाएं।वीरों ने बढ़ते कदम…