कविताएँ

  • प्राची अमर उजाला है | Prachi Amar Ujala Hai

    प्राची अमर उजाला है ( Prachi Amar Ujala Hai ) संसार प्रकृति के नियमों के अधीन है lऔर परिवर्तन एक नियम है lशरीर तो मात्र एक साधन है lआज इसका है ,तो कल उसका है lओ मेरी भारत की बेटी lक्या सोचा था ? क्या होगया ? तुझे प्रतिभा का दर्पण नहीं ,प्रतिभा की उमँग…

  • जीवन तरंगिणी : ( दिकु के प्रति प्रेम के भाव )

    जीवन तरंगिणी ( Jeevan tarangini ) जीवन की इस तरंगिणी में, तेरे साथ बहता हूँ,हर लहर में तेरा नाम लेकर मैं खुद को ढूंढता हूँ।तेरे बिना भी दिल की धड़कनों में तू ही बसी रहती है,बस एक तेरे वजूद से ही तो मेरी दुनिया चलती है। हर ख्वाब में तेरे संग होने का एहसास पाता…

  • शिकायत Shikayat

    शिकायत ( Shikayat ) तूने नज़रें फेरीं, मगर तू मेरी रूह में बसी रह गई,तेरे बिना ये अधूरापन, जैसे कोई दास्तां अधूरी रह गई।तेरे बिना भी ये दिल तुझसे ही जुड़ा रहता है,शिकायतें हैं तुझसे, पर प्यार फिर भी हदों से परे करता है। तेरी खामोशियों में छिपी हैं अनगिनत बातें,तेरे ख्यालों से अब भी…

  • बांसुरी बजाने बाला

    बांसुरी बजाने बाला बांसुरी बजाने बाला कन्हाई नहीं होता।मजबूरी में लिया फैसला बेवफाई नही होता। बाज़ू न होने का दर्द उससे पूछो।जिसका कोई भाई नहीं होता। मां को ठुकराओगे इस कदर तो।दुःख में आंचल सहाई नहीं होता। उसकी सूरत ओ लिबास मत देखो।सच कहने वाला सौदाई नहीं होता। रह कर दिल में न मिलने का…

  • दिल तो करता है कि | Dil to Karta Hai Ki

    दिल तो करता है कि ( Dil to Karta Hai Ki ) धूप को बांध एक गठरी मेंहवा का रुख मोड़ दूं … सहरा की तपती रेत मेंपानियों की बौछार कर दूं… दिल को भींच हाथों मेंलहू हलक में उसके उतार दूं… उधड़ती बुनती ज़िंदगी कोऊन का गोला सा बना उछाल दूं… क्या कहेगा कोई,…

  • सुमा मण्डल की कविताएं | Suma Mandal Poetry

    हमें संग ले जाइए आपसे दूर और रहा न जाए।दर्द कितना होवे कहा न जाए।हे दयासागर! आ जाइए।हमको सदा के लिए संग ले जाइए।। श्री चरणों से दूर प्रयोजन नहीं कहीं हमारा।निष्प्राण देह यह विरह का मारा।परमानंद की ज्योति जगाइए।हे दयासागर! आ जाइए।हमको सदा के लिए संग ले जाइए ।। कितनी बहाएंगी और आंसू अंखियां।ताना…

  • भारत की बेटी ” हिंदी ” हमारी

    भारत की बेटी ” हिंदी ” हमारी साहित्य की फुलवारी lलगती सबसे न्यारी llडंका बजा कोने – कोने में lएक ही आवाज गूँजी हर मन में llप्रतिष्ठा की है , अधिकारी lहिंदुस्तान की है , बोली प्यारी llबोलो कश्मीर से कन्याकुमारी lबने राष्ट्रभाषा हिंदी हमारी ll संस्कृत से जन्मी हिंदी हमारी lसंस्कार से अलंकृत हिंदी…

  • संत कुमार सारथि की कविताएं | Sant Kumar Sarthi Poetry

    गजानन प्रथम पूज्य अधिदेव गणेशा,विघ्न विनायक अनुपम वेशा।भाद्र मास शुक्ल बुद्धवारा,लिया चतुर्थी को अवतारा।शंकर सुवन उमा महतारी,तेरी महिमा अद्भुत न्यारी।एकदंत लंबोदर रूपा,निश दिन पूजे सुर नर भूपा।पीत वसन वर मुद्रा धारी,सब जग के तुम हो हितकारी।चढे़ पुष्प फल मोदक मेवा,देवन में हो अधिपति देवा।पाश परशु त्रिशूल है धारे,कार्तिक जैसे भाई प्यारे।रिद्धि और सिद्धि संग नारी,स्वास्तिक…

  • नमामि गंगे | Namami Gange

    नमामि गंगे ( Namami Gange ) नमामि गंगे , नमामि गंगे ।हर हर गंगे , हर हर गंगे ।आओ गंगा में, डुबकी लगायें ।तन और मन , को शुद्ध बनायें ।गंगाजल की ,यह शीतलता ।करती दूर ,ह्रदय की मलिनता ।आओ शुद्ध करें ,इस जल को ।कैसे भी बस , स्वच्छ यह जल हो ।जय हो…

  • चलो चलें | Chalo Chale

    चलो चलें ( Chalo Chale ) यह संसार तो दुःख का घर है।सपने में भी नहीं सुख यहाँ पर है। माया के हाथों में है सबकी डोर ।फिराए चाहे माया जिस भी ओर।लाचार जीव धुनें सिर पकड़ है।सपने में भी नहीं सुख यहाँ पर है। भटक-भटक कर थक जाएँ।सुकून कहीं पर न जीव पाएँ।भक्ति बिना…