ज़फ़रुद्दीन ज़फ़र की ग़ज़लें | Zafaruddin Zafar Poetry
“नभ में बिछड़ा सपना” ✈️ उड़ा था एक सपना आसमान की ओर,उम्मीदों से भरा, मुस्कानों का संजोर।अहमदाबाद से लंदन की थी राह,किंतु विधि ने रच दिया दुखों की चाह। हवा में था विश्वास, प्रगति की बात,किंतु पल में टूटा सब, हो गई रात।धुएं के गुबार में छुप गया जहान,जलते हुए आकाश में बुझ गई पहचान।…










