इश्क़ को एहसान के जैसे जताया मत करो

इश्क़ को एहसान के जैसे जताया मत करो

इश्क़ को एहसान के जैसे जताया मत करो

इश्क़ को एहसान के जैसे जताया मत करो
इस कदर जाने की जल्दी है तो आया मत करो।

जानते हम अहमियत अपनी तुम्हारे सामने
तो ये किस्से बेक़रारी के सुनाया मत करो।

मुस्कुराने पे बहुत दिलकश लगा करते हो तुम
महफिलों में बेवजह तब मुस्कुराया मत करो।

एक दूजे के रहें पाबंद ये तो शर्त थी
शर्त फ़िर तुम रोज़ ही ये भूल जाया मत करो।

अब ज़रा लिक्खो ग़ज़ल जो रूह को तसकीन दे
नफरतों को दे हवा वो नज़्म गाया मत करो।

आजमाने में बिगड़ जाते हैं रिश्ते आजकल
दोस्तों को हर घड़ी यूं आजमाया मत करो।

उड़ते उड़ते कोई चिंगारी न तुम पर आ गिरे
आग औरों के नशे मन में लगाया मत करो।

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

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