ग़ज़ल

  • हर लम्हा है हसीन | Ghazal Har Lamha

    मेरी ग़ज़ल ( Meri Ghazal ) मिलती सभी से मेरी ग़ज़ल दिलकशी के साथ शीरीं ज़ुबां है उसकी बड़ी चासनी के साथ हम जीते ज़िंदगी को हैं दरियादिली के साथ हर लम्हा है हसीन फ़क़त मैकशी के साथ बातें करेंगे वस्ल की और इंतिज़ार की इक़रार-ए-इश्क़ की सदा संजीदगी के साथ बीती सुख़नवरी में ही…

  • “जैदि” की ग़ज़ले | Zaidi ki Ghazlein

    अजनबी मुसाफिर थे तन्हा राहों में प्यासी जमीं को, जीवन मिल गया, बूंद गिरी पानी की बदन खिल गया। ==================== अजनबी मुसाफिर थे तन्हा राहों में, चंद मुलाकात में कोई ले दिल गया। ==================== मुझको हाल ए दिल की ख़बर न थी, न जाने कैसे पैदा कर मुश्किल गया। ===================== सब कुछ लुटा देख मैं…

  • उसकी आवाज़ | Ghazal Uski Awaaz

    उसकी आवाज़ ( Ghazal Uski Awaaz ) दिल को राह़त सी दिखाई दी है। उसकी आवाज़ सुनाई दी है। कौन कहता है कमाई दी है। उसने बस नाज़ उठाई दी है। उसके बातिन में यही है शायद। उसने जब दी है बुराई दी है। मेरे बारे में तुम्हें उसने फिर। जो ख़बर दी है हवाई…

  • अब हम | Ghazal Ab Hum

    अब हम ( Ab Hum ) पहले अपनी इ़नान देखेंगे। फिर जहाँ का गुमान देखेंगे। सीख लें ढंग जंग के फिर हम। सबके तीर-ओ-कमान देखेंगे। पर हमारे तराशने वालो। हम तुम्हारी उड़ान देखेंगे। यह करिशमा दिखाएंगे अब हम। सर झुका कर जहान देखेंगे। हम तो कुछ कर नहीं सके लेकिन। अब तुम्हारा ज़मान देखेंगे। रंग…

  • इस जमाने में | Ghazal Is Zamane Mein

    इस जमाने में ( Is Zamane Mein )  जुबां को थोड़ी सी असरदार कीजिए, करो जब भी बात, वजनदार कीजिए। =================== कलंक पसरा है इतना संभल के इनसे, जहान में बेदाग,तुम किरदार कीजिए। =================== कभी किसी से मिलो,लगे मिला कोई, दुखे दिल,रिश्ता ऐसा दमदार कीजिए। =================== शराफ़त न ढूंढो इस जमाने में यार मेरे, सभंल…

  • घर को संभाले | Ghazal Ghar ko Sambhale

    घर को संभाले ( Ghar ko Sambhale ) इस दिल को बता तू ही करूँ किसके हवाले अब तेरे सिवा कौन मिरे घर को संभाले इक बात ही कहते हैं यहाँ आके पड़ोसी जब तुम थे बरसते थे यहाँ जैसे उजाले मेरे ही तबस्सुम से तिरा रूप खिला है तू अपनी निगाहों के कभी देख…

  • अ़हदो पैमान की स़दाक़त को

    अ़हदो पैमान की स़दाक़त को अ़हदो पैमान की स़दाक़त को। आज़मा ले मिरी मुह़ब्बत को। यूं न पर्दा हटा ह़सीं रुख़ से। क़ैद रहने दे इस क़यामत को। उनकी नज़रों से पी ले जो वाइ़ज़। भूल जाए वो राहे जन्नत को। आ गई नींद अब मुझे दिलबर। अब न आना मिरी अ़यादत को। पैरवी जिसने…

  • इस ह़िमाक़त में क्या है | Ghazal Is Himaqat Mein Kya Hai

    इस ह़िमाक़त में क्या है ( Is Himaqat Mein Kya Hai ) बताओ तुम्हीं इस ह़िमाक़त में क्या है। किसी की क़बाह़त,इहानत में क्या है। क़रीब उनके बैठो तो आए समझ में। बुज़ुर्गाने दीं की हिदायत में क्या है। झुकाकर तो देखो कभी अपने सर को। समझ जाओगे ख़ुद इ़बादत में क्या है। वो ज़ालिम…

  • फैसला दिल का | Ghazal Faisla Dil Ka

    फैसला दिल का ( Faisla Dil Ka ) जानता हूँ मैं फैसला दिल का इक हँसीं से है सामना दिल का क्यों समझते अलग मुझे उससे एक वो ही है रहनुमा दिल का किसलिए अब बुरा कहें उसको उसने जोड़ा है आइना दिल का जब भी उस पर नज़र पड़ी मेरी मुझको लगता वो देवता…

  • सुकूँ | Ghazal Sukoon

    सुकूँ ( Sukoon ) कभी सच्चा ये मंज़र हो नहीं सकता ग़लत पथ पर कलंदर हो नहीं सकता अमर है इस जहां में प्यार सदियों से फ़ना ये ढाई आखर हो नहीं सकता दुआ माँ बाप की जिसने नहीं ली है सुकूँ उसको मयस्सर हो नहीं सकता मेरी इनकम ये मुझसे कहती है हर दिन…