Category: शेरो-शायरी

  • जुल्म का अब हिसाब करना है | Zulm shayari

    जुल्म का अब हिसाब करना है ( Zulm ka ab hisab karna hai )     आज वो बेनकाब करना है जुल्म का अब हिसाब करना है   ख़ूब कर ली उसी ने अब चुगली कुछ तलब कुछ ज़वाब करना है   रोज़ कड़वी बातें बोले है वो रिश्ता उसको ख़राब करना है   फ़ासिले…

  • गुलाब है चेहरा | Ghazal gulab hai chehra

    गुलाब है चेहरा ( Gulab hai chehra )     बंद आज़म हिजाब है चेहरा जो यहाँ वो गुलाब है चेहरा   क्या मैं तारीफें  करुं उसकी वो ख़ुद में आफ़ताब है चेहरा   देखकर प्यार का नशा होता हुस्न जैसे शराब है चेहरा   आज तो वो नजर नहीं आया हुस्न का जो ज़नाब…

  • रोज़ ढूंढ़ा है वफ़ा का घर यहाँ | Wafa par shayari

    रोज़ ढूंढ़ा है वफ़ा का घर यहाँ ( Roz dhoonda hai wafa ka ghar yahan )     रोज़ ढूंढ़ा है वफ़ा का घर यहाँ इसलिए खाता रहा ठोकर यहाँ   फोड़ देता सर दग़ा उस छल कप का की नहीं था हाथ में पत्थर यहाँ   वो नजर आया नहीं चेहरा कहीं मैं रहा …

  • जल गये लोग | Aazam shayari

    जल गये लोग उसको गुलाबी कहाँ! ( Jal gaye log usko gulabi kahan )     जल गये लोग उसको गुलाबी कहाँ! फूल सा खिलता जब शबाबी कहाँ   अंजुमन में ख़िलाफ़ हो गये लोग सब जब उसे आज अपना ज़नाबी कहाँ   हो गया है यहाँ आपस यूं फ़साद जब उसे यूं  लोगों ने…

  • फूल सा इक शख़्स मुझको चाहता है | Ghazal-e-ishq

    फूल सा इक शख़्स मुझको चाहता है ( Phool sa ik shakhs mujhko chahta hai )     फूल सा इक शख़्स मुझको चाहता है पर किसी पत्थर से मेरा दिल लगा है   हिज्र उसका मुझको दीमक की तरह से दिन ब दिन अन्दर ही अन्दर खा रहा है   हो गया है मुझमें…

  • तुम्हारा घर भी जल जाएगा |Tumhara ghar bhi jal jayega

    तुम्हारा घर भी जल जाएगा ( Tumhara ghar bhi jal jayega )     तुम्हारा घर भी जल जाएगा , क्यों हो आग लगाते ।   नासमझ बन जाने की जिद, उन्हे भला कैसे समझाते।   नाम तुम्हारा ही आता , बताओं कैसे जख्म दिखाते।   टूटती नहीं ख़ाबो की ताबीर, मुझसे किया वादा कोई…

  • जैसे तुम हो पास कही | Jaise tum ho paas kahin

    जैसे तुम हो पास कही ( Jaise tum ho paas kahin )   ऐसा क्यो महसूस हो रहा, जैसे तुम हो पास कही। तेरे तन की खूशबू लगता’ मुझको जैसे पास अभी। शायद  है  ये  वहम  मेरा  या, मेरा पागलपन है, हुंकार हृदय तुझमे ही डूबा,तुझको ये एहसास नही।   इक कोरा कागज हूँ मैं…

  • ये क्या अजब दास्तां बन गई | Dastan shayari

    ये क्या अजब दास्तां बन गई ( Ye kya ajab dastan ban gayi )   ये क्या अजब दास्तान बन गई , खव्वाहिशे उसकी मेरे अरमान बन गई I   जिन राहो से गुजर गये वो कभी , वो मेरी मंजिलों की निशान बन गई I   दर्द के आगोश में तमन्नाओ की शाम ,…

  • वो मुझे देखकर मुस्कुराते रहे | Muskurahat Shayari

    वो मुझे देखकर मुस्कुराते रहे ( Wo mujhe dekh kar muskurate rahe ) वज़न: फाइलुन फाइलुन फाइलुन फाइलुन     इश्क बनके वो दिल में समाते रहे वो मुझे देखकर मुस्कुराते रहे   अक्स बनके वो आंखों में आते रहे रात भर मेरी नींदें उड़ाते रहे   एक पल के लिए उनको भूला नहीं सांस…

  • नहीं ग़म में कभी शामिल रहा है | Shayari on ghum

    नहीं ग़म में कभी शामिल रहा है  ( Nahin gam mein kabhi shamil raha hai )     नहीं ग़म में कभी शामिल रहा है ? ख़ुशी का वो मेरी क़ातिल रहा है   कभी भी पेश उल्फ़त से न आया हमेशा यूं बड़ा जाहिल रहा है   ख़ुशी का हो भला अहसास कैसे ग़मों…