Category: शेरो-शायरी
दुश्मनी की खूब गोली चली इन दिनों | Ghazal in dinon
दुश्मनी की खूब गोली चली इन दिनों! ( Dushmani ki khoob goli chali in dinon ) दुश्मनी की ख़ूब गोली चली इन दिनों! प्यार की डाली टूटी रही इन दिनों फूल कैसे खिलेंगे यहाँ प्यार के है लगी सी नज़र जो बुरी इन दिनों सुख गये धूप से नफरतों की ही…
ग़ैर हूँ ऐसा कुछ बोलकर वो गया | Gair hoon ghazal
ग़ैर हूँ ऐसा कुछ बोलकर वो गया ( Gair hoon aisa kuch bol kar wo gaya ) ग़ैर हूँ ऐसा कुछ बोलकर वो गया नफ़रतों का जहर घोलकर वो गया इक झलक और दीदार उसका करा रब कभी जो खिड़की खोलकर वो गया प्यार की गुफ़्तगू की नहीं है उसनें तल्ख़…
यार उससे भला गुफ़्तगू क्या करे | Ghazal guftagoo
यार उससे भला गुफ़्तगू क्या करे ( Yaar usse bhala guftagoo kya kare ) यार उससे भला गुफ़्तगू क्या करे छोड़ो भी यार अब तू मैं तू क्या करे वो बनेगा हक़ीक़त में मेरा नहीं प्यार की दिल जिसकी आरजू क्या करे के मिलेगी वफ़ा दोस्ती में नहीं अब वफ़ा की…
किनारों से पूछो | kinaro se puchho
किनारों से पूछो ( Kinaro se puchho ) फिजाओं का आलम बहारों से पूछो। दुल्हन की कहानी, कहारों से पूछो।। कैसे खड़ी है जमाने की सुनकर, मंजिल जहाँ में, सहारों से पूछो।। तूफाँ में कश्ती हिलोरें से जो लेवे न चलने का गम, किनारों से पूछो।। ना चाहा था तुमको देखेंगे…
न खुशियां मिली | Ghazal na khushiyan mili
न खुशियां मिली ( Na khushiyan mili ) न खुशियां मिली आस पास में कटे रोज़ दिन अब उदास में बुझा प्यास रब भेज कोई अब मुहब्बत कि जिस डूबा प्यास में दिखाते वही दुश्मनी मुझे देखे बैठे पास पास में न पीने कि वो दे गया क़सम भरा जाम…
कमी दिल में तुम्हारी | Ghazal kamee dil mein tumhari
कमी दिल में तुम्हारी ( Kamee dil mein tumhari ) कमी दिल में तुम्हारी ही यहाँ हो सनम मेरे चले आओ जहाँ हो ख़ुशी के फूल क्या मुझपर बरसेंगे यहाँ तो रोज़ ग़म की ही ख़िज़ाँ हो ख़फ़ा होकर वही बैठा बहुत है यहाँ जिसकी यादें दिल में रवाँ हो तुम्हारे…
प्यार से इक़रार किया रिश्ता नहीं | Ghazal pyar se iqrar
प्यार से इक़रार किया रिश्ता नहीं! ( Pyar se iqrar kiya rishta nahi ) प्यार से इक़रार किया रिश्ता नहीं! हम सफ़र वो ही बना मेरा नहीं देखिए किस बात का उसको गरूर प्यार वो इक़रार क्यों करता नहीं टूटे रिश्तें फ़िर नहीं जुड़ते कभी रूठना यूं ही मगर अच्छा नहीं…
इज्जत बहुत गुलाब को, दी हमको सिर्फ धूल | Ghazal
इज्जत बहुत गुलाब को, दी हमको सिर्फ धूल ( Izzat bahut gulab ko, di humko sirf dhool ) इज्जत बहुत गुलाब को, दी हमको सिर्फ धूल ! करने को फिर शिकायतें , आये हैं कुछ बबूल !! रब से अता उस जैसे ही, काॅंटे हमारे पास ! क्यों वो है दिलफरेब पै,…
गली उसकी बहुत पहरा रहा है | Ghazal gali uski
गली उसकी बहुत पहरा रहा है ( Gali uski bahot pahra raha hai ) गली उसकी बहुत पहरा रहा है यहाँ माहौल कुछ ऐसा रहा है बढ़ी है इसलिए दूरी उसी से उसी का नर्म कब लहज़ा रहा है दवाई ले नहीं पाया मगर यूं नहीं कल जेब में पैसा रहा…
कमी दिल में | Ghazal kami dil mein
कमी दिल में ( Kami dil mein ) कमी दिल में तुम्हारी ही यहाँ हो सनम मेरे चले आओ जहाँ हो ख़ुशी के फूल क्या मुझपर बरसेंगे यहाँ तो रोज़ ग़म की ही ख़िज़ाँ हो ख़फ़ा होकर वही बैठा बहुत है यहाँ जिसकी यादें दिल में रवाँ हो तुम्हारे बिन…