Chai ki Chuskiyan

चाय की चुस्कियां | Chai ki Chuskiyan

चाय की चुस्कियां

( Chai ki chuskiyan )

 

चाय की चुस्कियों में तबियत खुश हो गई।
चेहरे पे रंगत छाई आंगन में रौनक हो गई।
महक उठी महफिल अजीज मिल बैठे यार।
कहकहो का दौर लेके आई हंसी की बहार।

चाय की चुस्कियों ने मीठी कर दी जुबान को।
अदरक ने रुतबे से खुश किया मेहमान को।
गृहलक्ष्मी ने परोसी चाय हमें बड़े प्यार से।
चीनी सी घुलकर दिल में उतर गई यार वो।

जब भी कहीं जाता हूं चाय की चुस्की लेता हूं।
अपनों की महफिल में अधरों को सी लेता हूं।
रिश्तो की डोर को चाय ने ही संभाल रखा है।
खुशियों के आलम में मैं हंसकर जी लेता हूं।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

गुनगुनाती धूप | Gunagunati Dhoop

Similar Posts

  • हक की बात | Haq ki Baat

    हक की बात ( Haq ki Baat ) पत्थर के सब देवता, पत्थर के जो लोग। होते सौरभ खुश तभी, चढ़ जाता जब भोग।। देकर जिनको आसरा, काटा अपना पेट। करने पर वो हैं तुले, मुझको मलियामेट।। टूटे सपना एक तो, होना नहीं उदास। रचे बढ़े या फिर करे, कोई नया प्रयास। अपने हक की…

  • जमाने में मेरा हाल | Zamane mein mera haal

    जमाने में मेरा हाल ( Zamane mein mera haal )   बदजात जमाने से मेरा हाल न पूछों जो जानना हो कुछ मेरे पास तुम आओ मैं बेहतर बताऊंगा दूसरे से यार न पूछों मैं चलता चला जाऊंगा फिर ठहर नही पाऊंगा दूसरे से मेरी मंजिल को मेरे यार न पूछो बदजात जमाने से मेरा…

  • Neend par Kavita | नींद नहीं आसां

    नींद नहीं आसां ( Neend Nahi Aasan ) चीज नई नहीं है, सहज भी नहीं है। बमुश्किल आती है, मेहनतकशों को लुभाती है। आरामतलबों को रूलाती है, बमुश्किल उन्हें आती है; अनिद्रा रोगी बनाती है। खाते औषधि दिन रात, फिर भी बनती नहीं बात। बद से बदतर जब होते हालात- तो निकलते सुबह सैर पर,…

  • मैं चाहता हूं

    मैं चाहता हूं   मैं चाहता हूं तुम्हारे हृदय में दो इंच ज़मीन जहाँ तुम रख सको मुझे विरासत की तरह सम्भाल कर पीढ़ियों तक बिना गवाएँ एक इंच भी……. बस तुम इतना कर लेना ज़मीन की तरह मुझ में बोते रहना अपने प्रेम का अंकुर और देखते रहना अपलक बढ़ते हुए……!!   ? कवि : सन्दीप…

  • समझ नहीं आता | Kavita Samajh Nahi Aata

    समझ नहीं आता ( Samajh Nahi Aata ) कैसी ये उहापोह है समझ नहीं आता क्यों सबकुछ पा जाने का मोह है समझ नहीं आता लक्ष्य निर्धारित किए हुए हैं फिर भी कैसी ये टोह है समझ नहीं आता खुशियों के संग की चाहत है रिश्तों से फिर क्यों विछोह है समझ नहीं आता शिखा…

  • दीवाली मन गई | Diwali Man Gai

    दीवाली मन गई ( Diwali man gai )    दीपो की बारात आई तुमको अपने साथ लाई । खुशियों की सौगात पाई अब दीवाली मन गई । मेरी दीवाली मन गई । सुर बिना हो साज जैसे वैसे मै जीती रही । काम न था काज कुछ बन बांवरी फिरती रही । नाम जब तुमने…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *