चांद पर तिरंगा | Chand par Tiranga

चांद पर तिरंगा

( Chand par tiranga )

 

आज हमने चांद को अपना बना लिया
तिरंगा अपने देश का उस पर फहरा दिया….

आईं जो मुस्किलें हम उनसे डरे नहीं
मुस्किलों में हौसलों को थामें हम रहें
हम भारती के लाल हैं क्यों हार से डरे
हार में ही जीत है सबको दिखा दिया
आज हमने चांद को अपना बना लिया………

आज हमने चांद को अपना बना लिया,
तिरंगा अपने देश का उस पर फहरा दिया।

धरती से अब चांद की दूरी खतम हुई,
अब तक थी अधूरी वो कहानी पूरी हुई।
अब हमने अपनी जीत का ऐलान कर दिया,
तिरंगा अपने देश का उस पर फहरा दिया ।
आज हमने चांद को अपना बना लिया……..

इसरो के वैज्ञानिकों ने ,यह इतिहास रच दिया,
जो कोई कर सका, न वह काम कर दिया।
रिश्ता था बड़ा ख़ास, उसे और खास कर दिया,
धरती और चांद को पास पास कर दिया ।
तिरंगा हमारा चांद ने स्वीकार कर लिया
आज हमने चांद को अपना बना लिया………

सब सोचते रहे ,और हमने करके दिखा दिया।
राखी से पहले धरती मां को यह उपहार दे दिया।
अब मां की राखी चांद को हर साल जाएगी
राखी के साथ मां की संताने जाएंगी,
मां भारती के पुत्रों ने यह काम कर दिया।
राखी के रूप में चंद्रयान दे दिया।

रूबी चेतन शुक्ला
अलीगंज ( लखनऊ )

यह भी पढ़ें :-

जनमत हूं शान हूं | Janamat

Similar Posts

  • हाड़ कपावै थर थर ठण्डी | Thandi

    हाड़ कपावै थर थर ठण्डी   माह दिसम्बर चहुं दिगम्बर छाया कुहरा धरती अम्बर, न आगे न पीछे सूझै काव करी कुछ मन न बूझै ठंडी कै बढ़ि गै प्रकोप बाप रे बप्पा होइ गै लोप भइल रात दिन एक समान कइसे बचै बाप रे जान ठंडी ठंडी बहय बयार बाहर निकलब भय दुस्वार हाड़…

  • नवरात्री के नौ दिवस | Navratri ke Nau Divas

    नवरात्रि के नौ दिवस ( Navratri ke nau divas ) नव दुर्गा नव रात्रे में माँ, तू नौ रूप में है दिखती।जन-जन की आस्था का बन केंद्र, सबके उर में है सजती।। नव रात्री के नौ दिवस माता, हम चरणों में माथ नवाते।रात रात भर कर जगराते, उर में भक्ति भाव उपजाते।। द्वितीय दिवस का…

  • नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) चतुर्थ दिवस

    नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) चतुर्थ दिवस भुवाल माता को नमन हमारा ।भुवाल माता का स्मरण हमकोनिरन्तर अंतर्दृष्टि की औरप्रेरित करता रहता हैं किकुछ भीतर भी हैं ।शायद बाहर कम हैं औरभीतर अधिक का बोध देता रहता हैं ।बाहर की दृष्टि पदार्थ के चक्रव्यूहमें फंसाते हुए अंतर्ज्ञान कोरीकल्पना का बोध कराते हुएअतृप्ति पैदा करती रहती…

  • कजली तीज | Kavita Kajli Teej

    कजली तीज ( Kajli Teej ) देखो आया कजली (सत्तू) तीज का त्यौहार सखियां सब हो जाओ तैयार मेहंदी हाथों में रचाई करके सोलह श्रृंगार आई हरी- हरी चूड़ियां खनखन करती पायल भी छम छम है बजती बिंदिया की चमक अपार स्वस्थ रहे पिया खुशियों से भरा हो संसार सुहागिनें मंदिर में दर्शन को जाती…

  • होली के रंग | Poem Holi ke Rang

    होली के रंग ( Holi ke Rang )   होली के इन्द्रधनुषी रंग, बड़े लाजवाब हैं। जो ऐंठे रहते हैं हरदम, और नाक पे गुस्सा, उनके लिये इस होली में बढ़िया जवाब है। रंगों से है परहेज़ जिन्हें, दुबके पड़े घर पर, निकलेंगे अगर बाहर तो खानाखराब है। ऐ दोस्त मेरे होली-ए-दस्तूर ग़ज़ब का, दो…

  • ख्वाब | Khwab

    ख्वाब ( Khwab)    चाहते हो यदि ऊंचाई को छूना तो रखना याद एक बात सदा हर ऊंचाई के ऊपर भी ,होती है एक और ऊंचाई और उसी का नाम आपकी सफलता है… जमीन से ऊंचाई का सफर सीधा नही होता ठहराव के कई सराय आते हैं मध्य राह मे बहुत ही आकर्षक,लुभावने और मनोरंजक…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *