Chhand dharti maa

धरती माँ | Chhand dharti maa

धरती माँ

( Dharti Maa )

 

धरती मांँ धरती माँ,
लाल को लोरी सुना दो।
लड़े समर में वीर,
प्यार दो दुलार दो माँ।

 

शूरवीर महारथी,
योद्धा जांबाज सिपाही।
मातृभूमि चरणों में,
लाडलो को प्यार दो माँ।

 

अमर सपूत तेरे,
लड़ते सीना तान के।
जोश जज्बा भरपूर,
शक्तियां अपार दो माँ।

 

वीर महा समर में,
मातृभूमि मतवाले।
देशभक्त दीवानों को,
विजय का दान दो माँ।

 

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

अखियां लड़ गई | Geet akhiyan lad gayi

Similar Posts

  • पुष्प | Pushp

    पुष्प ( Pushp )   टूट के डाल से जुदा हो गया फूल तो अपना नूर खो गया मुरझाया मगर खुशबू दे गया बिन कहे बहुत कुछ कह गया जिंदगी बस यूं ही तमाम होगी मुस्कुराया अलविदा हो गया नाम था अब बेनाम हो गया काम का अब बेकाम हो गया नियति का उसे भान…

  • बेटी | Kavita

    बेटी ( Beti )   बेटी- है तो, माँ के अरमान है, बेटी- है तो, पिता को अभिमान है! बेटी- है तो, राखी का महत्त्व है, बेटी- है तो, मायका शब्द है!   बेटी- है तो, डोली है, बेटी- है तो, बागों के झुले हैं! बेटी- है तो, ननद- भाभी की ठिठोली है! बेटी- है…

  • फूलों सी कोमल नारी | Poem nari

    फूलों सी कोमल नारी ( Phoolon se komal nari ) अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की विशेष प्रस्तुति     सोनू!फूलों सी मासूम हो फूलों में सिक्त शबनम की बूंदे हो देखूँ तुम्हें जी भरके भी जी भरता नहीं बस तेरी तस्वीरों को ही देखता रहता हूँ     पूरी कायनात जैसी हो तुम तुम्हें देख खुदा…

  • लाल-लाल आंखें तेरी | Aankh par Kavita

    लाल-लाल आंखें तेरी ( Lal-lal aankhen teri )    लाल-लाल आंखें तेरी काले काले बाल। गोरे गोरे गाल गुलाबी मोरनी सी चाल। खुशी की फुलझड़ी जिद पे चाहे अड़ी। रोक-टोक घड़ी-घड़ी आफत गले पड़ी। मौसम की बहार है रंगों की फुहार है। दिल के जुड़े तार मेरा पहला प्यार है। उमंग जगाती मन में सागर…

  • श्रृंगार मेरा सब पिया से | Shringar Mera

    श्रृंगार मेरा सब पिया से ( Shringar mera sab piya se )    पांव में पायल कान में झुमके, कंगना बोल रहे जिया से। गौरी शरमाकर यूं बोली, श्रृंगार मेरा सब पिया से। नाक की नथली बाजूबंद, हार सज रहा है हिया पे। कमरबंद के घुंघरू बोले, श्रंगार मेरा सब पिया से। लाल लाल होठों…

  • धनतेरस | Dhanteras par kavita

    धनतेरस ( Dhanteras ) धन की देवी लक्ष्मी, सुख समृद्धि भंडार। यश कीर्ति वैभव दे, महालक्ष्मी ध्याइये। नागर पान ले करें, धूप दीप से पूजन। दीप जला आरती हो, रमा गुण गाइए। रिद्धि सिद्धि शुभ लाभ, सब सद्गुण की दाता। खुशियां बरसे घर, दीपक जलाइए। रोली मोली अक्षत ले, पूजन थाल सजाएं। मन वचन कर्म…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *