फैला दें विश्व मे मानवता का अमर प्रेम एवं विश्व शान्ति के नारों को

साम्प्रदायिकता | Sampradayikta kavita

 साम्प्रदायिकता 

( Sampradayikta : Hindi Poem)

 

है, अंधी विषकन्या

इसकी आँधी जब जहां चली,

छोड़ती गई विनाश,

गहरे दाग, मरघट सा सन्नाटा  !!

सम्प्रदायिकता

की खेती की जाती है !!

मंदिर , मस्जिद, गिरिजाघर एवं गुरुद्वारों में,

इसके लिए आवश्यकता होती है..

झूठे नारों एवं अफवाहों की !!

तभी तो इनका प्रयोग किया जाता है,

धर्म-भेद ,वर्ण-भेद , एवं वर्ग-भेद के कार्यों में !

साम्प्रदायिकता

 है सुगम प्रसारिणी,

 सभी आधुनिक संचार माध्यमों में !!

साम्प्रदायिकता

है अति संहारक

 सभी आधुनिक हथियारों में

जिसकी ज्वाला में जल रहे हैं,

भारत, इजरायल एवं अरब देश !!

आओ मिल कर तोड़ दें

धर्म-भेद , वर्ग-भेद  एवं

वर्ण- भेद की दीवरों को

फैला दें विश्व मे

मानवता का अमर प्रेम एवं

विश्व शान्ति के नारों को  ।

 

लेखक: आर.डी. यादव 

Ex ADCO ( co-operative UTTAR PRADESH )


यह भी पढ़ें :-

24+ Desh Bhakti Kavita in Hindi देश भक्ति कविता हिंदी में

Similar Posts

  • Shiv Stuti | शिव-स्तुति

    शिव-स्तुति ( Shiv Stuti ) ऐसे हैं गुणकारी महेश। नाम ही जिनका मंगलकारी शिव-सा कौन हितेश।।   स्वच्छ निर्मल अर्धचंद्र हरे अज्ञान -तम- क्लेश। जटाजूट में बहती गंगा पवित्र उनका मन-वेश।।   त्रिगुण और त्रिताप नाशक त्रिशूल धारे देवेश।। त्रिनेत्र-ज्वाला रहते काम कैसे करे मन में प्रवेश।।   तमोगुणी क्रोधी सर्प, रखते वश, देते संदेश।…

  • निपुण मिशन की ज्योति जलाएं | Nipun Mission par Kavita

    निपुण मिशन की ज्योति जलाएं  ( Nipun mission ki jyoti jalayen )    निपुण मिशन की ज्योति जलाएं आओ शिक्षा अभियान चलाएं।   अभिभावक संग मिल शिक्षक हम गढ़  भविष्य  बच्चों  का  उत्तम   बेहतर  भाषा  अंक    सिखाकर भारत  को  फिर  निपुण  बनाकर,   सरकार  की  मंशा  सफल  बनाएं निपुण मिशन की ज्योति जलाएं।…

  • शेखर की कविताएं | Shekhar Hindi Poetry

    पृथ्वी आज रोती पृथ्वी आज रोती करती हमसे विनती मत कर मेरा दोहन मैं हूं तेरा संजीवन पेड़-पौधे हैं मेरे वास मत कर इसका उपहास हिमनद हैं मेरी संरचना कर तू इसकी  अर्चना मत कर तू अबीर लगा एक पेड़ जरूर देर सबेर,देर सबेर टेर पर टेर,टेर पर टेर धरा का मैं नीला सागर धरा…

  • होली का रंग | Kavita Holi ka Rang

    होली का रंग ( Holi ka Rang ) भर पिचकारी उड़ा गुलाल रंगा रंग बना होली, प्रेम में सब उमड़े खिले मुखड़े ऐसी बना होली । त्वचा का भी ध्यान रख, कुदरत का भी मान रख, गुलाल लगा कर जश्न कर फिर सबका सम्मान रख । घर गली मोहल्ला सब, रंगो की बरसात कर, बुढी़…

  • प्यारी हिंदी

    प्यारी हिंदी मैं मिथिला का वो बेटा हूं, जिसे हिंदी से है यारी।मैं भाषी मैथिली हूं, फिर भी हिंदी प्राणों से है प्यारी।।मेरे धड़कन में लहरे हिंदी की बो गूंज है न्यारी।जिसे गाने को लालायित है दुनियां की हर नर नारी।। 1 कहीं हुंकार है दिनकर जी का है पंत से यारी।कहीं चौहान की गर्जन…

  • तन के उजले मन के काले | Tan ke Ujle Man ke Kale

    तन के उजले मन के काले ( Tan ke ujle man ke kale )   दुष्चक्रो के जाल फैलाए छल कपट दांव चलाए। भ्रष्टाचारी खुद हो जाए लूट खसोट वो अपनाए। घट में कितने नाग पालते स्वार्थ में रहते मतवाले। कैसे हैं मतलब वाले तन के उजले मन के काले। तन के उजले मन के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *