यूं तो अकेले होने का हौसला रखती हूं,
यूं तो अकेले होने का हौसला रखती हूं,

°°° यूँ तो °°°

यूं तो अकेले जीने का हौसला रखती हूं,

फिर कभी किसी का साथ क्यों चाहती हूं ।

 

यूं तो मंजिल अकेले ही तय करनी है मुझे,

फिर क्यों साथ सब के होना चाहती हूं ।

 

यूं तो अकेली कर ली हूँ खुद को सबसे अलग,

फिर क्यों जुड़ना चाहती हूं कभी सबसे ।

 

यूं तो अपनी जिंदगी, अपने उसूलों पर जीती हूं,

फिर क्यो कभी कुछ नम्य हो जाती हूं ।

 

यूं तो न झुकना है, न रुकना है सिद्धांत,

तोफिर किस लिए कभी रुक जाती हूं, झुक जाती हूँ ।।

 

लेखिका : ईवा ( ए रियल सोल )

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